झाबुआ जनसुनवाई में अनोखा मामला: ‘मृत’ घोषित दिव्यांग पहुंचा प्रशासन के सामने, सिस्टम पर उठे सवाल
ग्राम पंचायत मदरानी के बादरसिंह मुणिया, जो 98 प्रतिशत दिव्यांग हैं, और उनकी 85 प्रतिशत दिव्यांग पत्नी को पिछले दो वर्षों से सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया है। इस गंभीर त्रुटि के कारण दोनों की पेंशन, राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो गया है।
आधार और योजनाओं से वंचित परिवार, पेंशन और आवास भी अटके
इसी तरह कंजावानी निवासी गवरसिंह सोलंकी का परिवार भी लंबे समय से खाद्यान्न सहायता से वंचित है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली किस्तें भी रोक दी गई हैं। नौगावा की 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित सवली बेन और नयागांव की सबिस्ता कालिया कटारा के आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं, जिसके चलते वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन मामलों ने प्रशासनिक प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर किया है, जहां वास्तविक पात्र लोग योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
व्हीलचेयर परिवहन में भी बाधा, बस स्टाफ पर आरोप
आजाद विकलांग कल्याण समिति के अध्यक्ष कमलेश राठौर ने बताया कि हाल ही में समिति ने झाबुआ और अलीराजपुर के पांच दिव्यांगजनों को निःशुल्क इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर उपलब्ध करवाई थीं। इन्हें भोपाल से झाबुआ लाया जाना था, लेकिन यहां भी दिव्यांगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
आरोप है कि पहले से सहमति होने के बावजूद भाबर बस के कंडक्टर ने अंतिम समय पर व्हीलचेयर बस में चढ़ाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, बस स्टाफ ने बस में रखी दो व्हीलचेयर भी जबरन उतरवा दीं। समिति द्वारा दोगुना किराया देने की पेशकश के बावजूद बस कर्मियों ने बात नहीं मानी और दिव्यांगों को आधी रात को भोपाल बस स्टैंड पर छोड़ दिया।
टेम्पो से मंगानी पड़ी व्हीलचेयर, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थिति इतनी खराब हो गई कि समिति को 12 हजार रुपये खर्च कर लोडिंग टेम्पो के माध्यम से व्हीलचेयर झाबुआ मंगवानी पड़ी। इस घटना के बाद दिव्यांगजनों और समिति ने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधार की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता की कमी को भी सामने लाते हैं।
