May 25, 2026

पीएम मोदी की गिफ्ट डिप्लोमेसी में सबसे खास बनी ‘भगवद गीता’, कई राष्ट्राध्यक्षों को उनकी भाषा में दी सौगात

0
27-1779536717


नई दिल्ली ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं अक्सर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ उनकी अनोखी ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ को लेकर भी सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को दिया गया खास उपहार चर्चा का विषय बना, लेकिन इसके पीछे एक और ऐसी सांस्कृतिक सोच है जिसे प्रधानमंत्री मोदी वर्षों से वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करते आए हैं। यह सोच भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की है, जिसमें ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सबसे अहम भूमिका निभाती रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से कई अंतरराष्ट्रीय दौरों पर विदेशी नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए हैं। इनमें ‘भगवद गीता’ सबसे ज्यादा खास रही। खास बात यह रही कि उन्होंने जिस भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को गीता भेंट की, वह उसी देश की भाषा में प्रकाशित प्रति थी। इससे न केवल भारतीय संस्कृति का सम्मान बढ़ा, बल्कि दूसरे देशों के नेताओं के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी जब अपने पहले अमेरिकी दौरे पर गए थे, तब उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘भगवद गीता’ की एक विशेष प्रति भेंट की थी। यह उपहार केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और दर्शन का प्रतीक माना गया। उस दौरान यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत करना चाहता है।

इसके बाद जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के सम्राट अकिहितो और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को जापानी भाषा में लिखी ‘भगवद गीता’ भेंट की थी। इस कदम को भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद खास माना गया। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल दिखाती है कि वे केवल राजनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि संस्कृति और विचारों के जरिए भी देशों के बीच गहरे संबंध बनाना चाहते हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी प्रधानमंत्री मोदी रूसी भाषा में लिखी ‘भगवद गीता’ की प्रति भेंट कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि गीता के विचार और संदेश पूरी दुनिया के लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से यह बात दोहरा चुके हैं कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला ग्रंथ है।

प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि ‘भगवद गीता’ के संदेश केवल व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण और नीतियों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कई मौकों पर गीता के श्लोकों और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अन्याय और असत्य के खिलाफ खड़े होना ही सच्चे धर्म का मार्ग है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की यह सांस्कृतिक कूटनीति भारत की सॉफ्ट पावर को दुनिया में मजबूत करने का प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। गिफ्ट डिप्लोमेसी के जरिए भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जिस तरह वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया है, उसने भारत की छवि को नई मजबूती दी है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *