May 8, 2026

Turkey-Indonesia Defense Deal: तुर्की के ड्रोन पावर पर भरोसा, इंडोनेशिया खरीदेगा दुनिया का पहला UCAV; एशिया में बदल सकते हैं सैन्य समीकरण

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नई दिल्ली। इंडोनेशिया और तुर्की  के बीच बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसने एशिया की सुरक्षा राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इस डील के तहत इंडोनेशिया तुर्की से अत्याधुनिक Kizilelma UCAV (मानवरहित लड़ाकू विमान) खरीदेगा। खास बात यह है कि इंडोनेशिया इस ड्रोन फाइटर जेट का पहला विदेशी ग्राहक बन गया है। रक्षा विशेषज्ञ इसे तुर्की की बढ़ती सैन्य ताकत और ASEAN क्षेत्र में उसके प्रभाव विस्तार की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की की एयरोस्पेस कंपनी Baykar Technologies और इंडोनेशिया की रक्षा कंपनी Republicorp के बीच 12 Kizilelma UCAV की डील पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते में भविष्य में 48 अतिरिक्त विमानों की खरीद का विकल्प भी शामिल है। तुर्की की योजना 2028 से इन विमानों की डिलीवरी शुरू करने की है।

डील की सबसे अहम बात यह है कि इंडोनेशिया में इन UCAV के उत्पादन और रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे इंडोनेशिया की घरेलू रक्षा क्षमता मजबूत होगी, वहीं तुर्की को दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े रक्षा बाजार में गहरी पकड़ बनाने का मौका मिलेगा।

इंडोनेशिया पहले ही Baykar के TB2 और Akinci ड्रोन खरीद चुका है। इसके अलावा उसने TB3 कैरियर बेस्ड ड्रोन सिस्टम की 60 यूनिट खरीदने की योजना भी बनाई है। माना जा रहा है कि इन्हें इंडोनेशिया अपने विमानवाहक पोत पर तैनात कर सकता है।

इससे पहले भी इंडोनेशिया तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने का समझौता कर चुका है। इसके साथ ही फ्रिगेट, मध्यम टैंक, एयर डिफेंस मिसाइल और बैलिस्टिक सिस्टम जैसे कई रक्षा सौदे दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे हैं।

Kizilelma को तुर्की का पहला स्वदेशी जेट-संचालित मानवरहित लड़ाकू विमान माना जाता है। इस UCAV ने 2022 में पहली उड़ान भरी थी। इसे एयर-टू-एयर कॉम्बैट, एयर-टू-ग्राउंड अटैक, निगरानी, टोही, मिसाइल स्ट्राइक और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने जैसे मिशनों के लिए तैयार किया गया है।

कंपनी का दावा है कि यह AI आधारित सिस्टम से लैस है और इसे विमानवाहक पोत से भी ऑपरेट किया जा सकता है। इसकी अधिकतम गति करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि यह 1,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि तुर्की और इंडोनेशिया की यह बढ़ती सैन्य साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब तुर्की का झुकाव पाकिस्तान के पक्ष में माना जाता है, भारत भी अपने पड़ोस में हो रहे इन रक्षा समझौतों पर करीबी नजर बनाए हुए है।

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