Dollar vs Yuan: चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत से अमेरिका चिंतित, युआन के बढ़ते असर पर ट्रंप प्रशासन को चेतावनी
अमेरिकी सांसदों ने जताई चिंता
रिपब्लिकन सीनेटर टेड बड और डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन द्वारा पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर का वैश्विक रिजर्व करेंसी बने रहना अमेरिका की आर्थिक ताकत और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
सीनेटरों ने चेतावनी दी कि चीन युआन के जरिए ऐसा वित्तीय नेटवर्क तैयार कर रहा है, जो भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रभाव को कमजोर कर सकता है।
डॉलर की हिस्सेदारी में गिरावट
प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 1999 में वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी करीब 71% थी, जो 2025 की तीसरी तिमाही तक घटकर 56.82% रह गई है। हालांकि युआन की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है, लेकिन चीन लगातार उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भुगतान प्रणाली में आगे बढ़ा रहा है।
चीन कैसे बढ़ा रहा है युआन का असर?
अमेरिकी सांसदों ने कहा कि चीन अपनी Belt and Road Initiative (BRI) के जरिए विकासशील देशों में भारी निवेश कर आर्थिक निर्भरता बढ़ा रहा है। 2013 से अब तक चीन इस परियोजना के तहत दुनिया भर में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश कर चुका है।
इसके अलावा चीन का Cross-Border Interbank Payment System (CIPS) भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसे SWIFT सिस्टम के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 1700 से ज्यादा बैंक अब इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।
अमेरिका को किस बात का डर?
अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यदि भविष्य में ताइवान या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कोई बड़ा संकट पैदा होता है, तो चीन का वैकल्पिक वित्तीय नेटवर्क पश्चिमी देशों की आर्थिक पकड़ को कमजोर कर सकता है।
इसी वजह से अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने और विकासशील देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति पर जोर दे रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में डॉलर और युआन के बीच आर्थिक प्रभाव की यह प्रतिस्पर्धा वैश्विक व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।
