शनि जयंती 2026: 16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि, महत्व और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय
शनि जयंती 2026 की सही तिथि
पंचांग के अनुसार
अमावस्या प्रारंभ: 16 मई 2026, सुबह 4:12 बजे
अमावस्या समाप्त: 17 मई 2026, रात 1:31 बजे
उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 16 मई 2026 (शनिवार) को ही मनाई जाएगी।
शनि जयंती का धार्मिक महत्व
शनि जयंती को अत्यंत शक्तिशाली दिन माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा सेशनि दोष का प्रभाव कम होता हैजीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैंकर्मों के अनुसार फल देने वाले शनि देव प्रसन्न होते हैं
शनि जयंती पूजा विधि
1. सुबह की शुरुआत
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
काले या गहरे रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें
2. पूजा स्थापना
पूजा स्थान पर काले कपड़े का आसन बिछाएं
शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
3. अभिषेक और पूजन
पंचामृत या गंगाजल से स्नान कराएं
कुमकुम, काजल और फूल अर्पित करें
सरसों के तेल का दीपक जलाएं
4. भोग और मंत्र जाप
तेल से बने मीठे व्यंजन या काले तिल का भोग लगाएं
ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें
शनि चालीसा का पाठ करें
5. आरती और क्षमा प्रार्थना
विधिवत आरती करें
पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें
शनिदेव को प्रसन्न करने के सरल उपाय
1. काले चने का दान
काले चने का प्रसाद बनाकर बंदरों को खिलाना बेहद शुभ माना जाता है।
2. पीपल पूजा
पीपल के वृक्ष पर जल और काले तिल अर्पित करें तथा नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं।
3. मंत्र जाप
ॐ शं शनैश्चराय नमः
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
इन मंत्रों का 108 बार जाप करें।
4. दान-पुण्य
गरीबों को काले जूते, काला छाता, काले तिल और भोजन दान करें।
ज्योतिषीय मान्यता
ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह व्यक्ति के कर्मों का फल देने वाला ग्रह है। इसलिए इस दिन किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। साथ ही यह दिन धैर्य, अनुशासन और कर्म सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।शनि जयंती केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्म-सुधार और कर्म सुधार का अवसर माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।
