AI और सामाजिक न्याय पर CJI का बड़ा बयान, बोले- गरीबों के प्रति दिख रहा पूर्वाग्रह
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर एक महत्वपूर्ण चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक गरीबों और वंचित वर्गों के प्रति अंतर्निहित पूर्वाग्रह प्रदर्शित कर रही है, जो भविष्य में सामाजिक असमानता को और गहरा कर सकती है।
नई दिल्ली में ‘रिस्पेक्ट इंडिया’ द्वारा आयोजित आठवें दिनकर स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए सीजेआई ने कहा कि सामाजिक न्याय किसी भी मानवीय और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। उन्होंने महान कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के महाकाव्य रश्मिरथी का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता, गरिमा और सामाजिक समरसता जैसे आदर्श भारतीय संविधान से पहले ही साहित्य में मजबूत रूप से व्यक्त किए जा चुके थे।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है।
जब तक समाज के हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा नहीं मिलेगी, तब तक वास्तविक लोकतंत्र और सामाजिक न्याय संभव नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी समाज में आर्थिक और सामाजिक विषमताएं बनी हुई हैं और दिनकर की रचनाओं में जिन असमानताओं का उल्लेख किया गया था, वे आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों, विशेष रूप से एआई आधारित सिस्टम, को यदि संवैधानिक मूल्यों और मानवीय संवेदनशीलता के साथ विकसित नहीं किया गया तो वे सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। उनके अनुसार तकनीक का उद्देश्य केवल सुविधा प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।
सीजेआई ने साहित्य और संवैधानिक नैतिकता के संबंध पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को संवेदनशील बनाता है, जबकि संविधान उसे न्याय और समानता की दिशा देता है। दोनों मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकते हैं जहां हर व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर मिले।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा सांसद मनोज तिवारी को ‘दिनकर संस्कृति सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिनकर की कविताएं आज भी समाज को प्रेरित करती हैं और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि दिनकर के साहित्य में न्याय और समानता के वे मूल सिद्धांत दिखाई देते हैं, जो भारतीय सभ्यता की आत्मा से जुड़े हुए हैं। वहीं ‘रिस्पेक्ट इंडिया’ के संस्थापक मनीष कुमार चौधरी ने कहा कि यह मंच साहित्य, संस्कृति और सामाजिक दायित्वों को एक साथ लाने का प्रयास है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि दिनकर के साहित्य में न्याय और समानता के वे मूल सिद्धांत दिखाई देते हैं, जो भारतीय सभ्यता की आत्मा से जुड़े हुए हैं। वहीं ‘रिस्पेक्ट इंडिया’ के संस्थापक मनीष कुमार चौधरी ने कहा कि यह मंच साहित्य, संस्कृति और सामाजिक दायित्वों को एक साथ लाने का प्रयास है।
सीजेआई सूर्यकांत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में एआई के नैतिक उपयोग और उसके सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीर बहस चल रही है। उनके विचार इस दिशा में भारत की संवैधानिक सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से सामने रखते हैं।
