तमिलनाडु में सत्ता समीकरण बदले, TVK के साथ आई कांग्रेस, भाजपा को दूर रखने की शर्त…
कांग्रेस द्वारा लिए गए इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन कुछ शर्तों के साथ दिया गया है, जिसमें सबसे अहम शर्त यह है कि सरकार में किसी भी तरह की सांप्रदायिक ताकतों की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में नए गठबंधन की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।
TVK ने हालिया राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत प्रदर्शन करते हुए विधानसभा में उल्लेखनीय सीटें हासिल की हैं। पार्टी को 100 से अधिक सीटों पर सफलता मिली है, जिससे वह सरकार गठन की स्थिति में पहुंच गई है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
इस नए राजनीतिक समीकरण का सबसे बड़ा असर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के पुराने गठबंधन पर पड़ता दिखाई दे रहा है। दोनों दल पिछले कई वर्षों से एक साथ राजनीति करते रहे हैं, लेकिन इस नए घटनाक्रम के बाद उनके रिश्तों में दूरी की स्थिति बनती नजर आ रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि औपचारिक तौर पर बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जनता ने इस बार एक ऐसी सरकार के पक्ष में मतदान किया है जो धर्मनिरपेक्ष और विकासोन्मुख हो। इसी आधार पर TVK को समर्थन देने का निर्णय लिया गया है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका समर्थन तमिलनाडु में एक स्थिर और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित सरकार के गठन के लिए है।
TVK की ओर से कांग्रेस से समर्थन की औपचारिक अपील की गई थी, जिसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर विचार किया और तमिलनाडु इकाई को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। राज्य इकाई और विधायक दल की बैठक के बाद इस समर्थन पर अंतिम मुहर लगाई गई।
इस नए गठबंधन को केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भविष्य की राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर लोकसभा और राज्यसभा चुनावों तक इस गठबंधन का असर देखने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है, जहां पारंपरिक गठबंधन समीकरण बदलते दिखाई देंगे। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित हो सकती है।
