बांग्लादेश की नई विदेश नीति या चीन की गहरी चाल? तारिक रहमान की सरकार में बढ़ते बीजिंग दौरे से उठे बड़े सवाल
सत्ता बदलते ही चीन की ओर झुकाव
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखा गया। नई सरकार बनने के कुछ ही महीनों में कई राजनीतिक दलों और सरकारी प्रतिनिधिमंडलों ने चीन का दौरा किया, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या ढाका अब बीजिंग को अपना प्रमुख साझेदार बना रहा है।
सरकार के कई प्रमुख नेताओं ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के निमंत्रण पर बीजिंग का दौरा किया और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।
लगातार बढ़ते चीन दौरे
बीते महीनों में BNP, जमात-ए-इस्लामी और अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों ने चीन की यात्रा की। इनमें उच्च स्तरीय बैठकों से लेकर आर्थिक सहयोग और निवेश पर बातचीत तक शामिल रही।
विशेष रूप से BNP महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के नेतृत्व में हुए प्रतिनिधिमंडल ने चीन के उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर “वन चाइना नीति” का समर्थन दोहराया, जिससे यह संकेत मिला कि ढाका बीजिंग के साथ रणनीतिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है।
चीन का बढ़ता आर्थिक प्रभाव
चीन पहले ही बांग्लादेश में 40 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजना या प्रतिबद्धता जता चुका है, जिसमें Belt and Road Initiative (BRI) के तहत बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल कूटनीतिक सहयोग नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की दीर्घकालिक योजना भी है।
भारत और क्षेत्रीय संतुलन पर असर
बांग्लादेश भले ही भारत के साथ संबंध सामान्य रखने की बात कर रहा हो, लेकिन चीन के साथ बढ़ती नजदीकी दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम पर भारत और अन्य पड़ोसी देश भी नजर बनाए हुए हैं।
नई विदेश नीति या रणनीतिक चाल?
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश “मल्टी-एलाइमेंट” यानी कई देशों के साथ संतुलित रिश्ते रखने की नीति अपना रहा है। लेकिन लगातार बढ़ते चीन दौरे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बीजिंग अब ढाका की विदेश नीति का सबसे अहम केंद्र बनता जा रहा है।
तारिक रहमान की सरकार के तहत बांग्लादेश की विदेश नीति एक नए मोड़ पर खड़ी है—जहां एक तरफ भारत के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश है, वहीं दूसरी तरफ चीन के साथ तेजी से गहराते रिश्ते एक नई रणनीतिक दिशा का संकेत दे रहे हैं।
