नेपाल में बड़ा प्रशासनिक झटका: 1500 से ज्यादा अधिकारियों की छुट्टी, बालेन सरकार के ‘राजनीतिक सफाई’ दावे से मचा सियासी तूफान
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति Ramchandra Paudel द्वारा जारी अध्यादेश के तहत 26 मार्च से पहले की गई सभी नियुक्तियों को अमान्य घोषित कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि ये सभी “राजनीतिक नियुक्तियां” थीं, जिन्हें पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के तहत हटाया गया है।
1594 अधिकारियों की छुट्टी, कई संस्थान प्रभावित
इस फैसले के बाद कुल 1594 अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। इसका सीधा असर देश के कई प्रमुख संस्थानों पर पड़ा है, जिनमें Nepal Electricity Authority, Tribhuvan University, B.P. Koirala Institute of Health Sciences और Nepal Airlines जैसे संस्थान शामिल हैं।इन संस्थानों में शीर्ष पद खाली हो जाने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार का पक्ष: ‘सुधार जरूरी था’
सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जरूरी था। अधिकारियों की नियुक्तियों में राजनीतिक प्रभाव को खत्म करना इसका मुख्य उद्देश्य बताया गया है।
विपक्ष और विशेषज्ञों की चिंता
हालांकि, विपक्ष और कई प्रशासनिक विशेषज्ञ इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों को हटाने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बालेन शाह सरकार पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में Balen Shah की सरकार का नाम भी चर्चा में है, जो पहले से ही “नई राजनीतिक व्यवस्था” और प्रशासनिक सुधार के एजेंडे को लेकर सक्रिय रही है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम राजनीतिक नियंत्रण को मजबूत करने की रणनीति भी हो सकता है।
नई नियुक्तियों को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है, जिससे प्रशासनिक अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द स्थायी व्यवस्था नहीं बनी तो देश की संस्थागत कार्यप्रणाली पर असर और गहरा सकता है।
फिलहाल नेपाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां सुधार और अस्थिरता के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
