एवरेस्ट पर हाई-टेक टकराव: अमेरिका के ड्रोन टेस्ट पर रोक, नेपाल ने चीन को पहले दी थी अनुमति; ट्रंप के दूत भी रहे मौजूद
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी कंपनी “Freefly Systems” के भारी-भरकम इंडस्ट्रियल ड्रोन का प्रदर्शन एवरेस्ट बेस कैंप (करीब 5,364 मीटर ऊंचाई) पर किया गया, लेकिन इसे औपचारिक उड़ान परीक्षण की मंजूरी नहीं मिली थी। नेपाली अधिकारियों ने साफ किया कि केवल डेमो हुआ था, जबकि वास्तविक फ्लाइट टेस्ट रोक दिया गया।
इस ड्रोन की समुद्र तल पर पेलोड क्षमता लगभग 15.88 किलोग्राम बताई जाती है, लेकिन इतनी ऊंचाई और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में इसकी वास्तविक क्षमता अभी भी परीक्षण के दायरे में ही है। अधिकारियों का कहना है कि एवरेस्ट जैसी कठिन परिस्थितियों में ड्रोन का प्रदर्शन तभी समझा जा सकता है जब इसे पूर्ण अनुमति के साथ उड़ाया जाए।
नेपाल प्रशासन ने इस टेस्ट को लेकर सुरक्षा और डेटा कलेक्शन से जुड़ी चिंताएं भी जताई हैं, क्योंकि एवरेस्ट क्षेत्र नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित एक संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र है। इसी वजह से सरकार ने किसी भी कमर्शियल या तकनीकी उड़ान से पहले विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताई है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले वर्ष नेपाल ने चीन की कंपनी DJI को इसी क्षेत्र में ड्रोन ऑपरेशन की अनुमति दी थी, जहां सफल हाई-एल्टीट्यूड डिलीवरी टेस्ट भी किया गया था। उस दौरान ड्रोन ने बेहद कठिन मौसम और ऊंचाई में 15 किलोग्राम तक सामान पहुंचाया था।
अब अमेरिका और चीन दोनों की बढ़ती सक्रियता ने हिमालय क्षेत्र को हाई-टेक टेस्टिंग और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के नए केंद्र के रूप में उभार दिया है, जहां तकनीक के साथ-साथ भू-राजनीतिक संतुलन भी लगातार चुनौती बनता जा रहा है।
