बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण की वोटिंग शुरू, 142 सीटों पर जनता कर रही फैसला
नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण शुरू होते ही सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार सुबह से पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर मतदान जारी है, जहां करीब 3.21 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस चरण में 1448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला आज जनता के हाथ में है।
चुनाव आयोग ने इस बड़े मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए 41 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
वोटर लिस्ट पर जारी विवाद
इस चुनाव में मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 12.90 लाख से ज्यादा आवेदन लंबित थे, लेकिन अब तक बेहद कम आवेदनों को ही मंजूरी मिल सकी है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
पहले चरण में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
इस चुनाव में मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 12.90 लाख से ज्यादा आवेदन लंबित थे, लेकिन अब तक बेहद कम आवेदनों को ही मंजूरी मिल सकी है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
पहले चरण में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
क्यों अहम है दूसरा चरण?
दूसरे चरण को चुनाव का सबसे निर्णायक चरण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके शामिल हैं। कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और नदिया जैसे जिलों में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
इन्हीं क्षेत्रों को चुनावी परिणामों का “गेम चेंजर” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां के नतीजे अक्सर सत्ता की दिशा तय करते हैं।
दूसरे चरण को चुनाव का सबसे निर्णायक चरण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके शामिल हैं। कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और नदिया जैसे जिलों में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
इन्हीं क्षेत्रों को चुनावी परिणामों का “गेम चेंजर” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां के नतीजे अक्सर सत्ता की दिशा तय करते हैं।
सियासी दावे और आरोप-प्रत्यारोप
चुनाव के इस चरण में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दावा है कि यह उसका मजबूत गढ़ है और यहां से उसे बड़ी जीत मिलेगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना है कि दक्षिण बंगाल में मजबूत प्रदर्शन के बिना सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है।
चुनाव के इस चरण में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दावा है कि यह उसका मजबूत गढ़ है और यहां से उसे बड़ी जीत मिलेगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना है कि दक्षिण बंगाल में मजबूत प्रदर्शन के बिना सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है।
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भी विवाद गहरा गया है। कई जिलों में लाखों नाम हटाए जाने का दावा किया गया है, जिस पर टीएमसी ने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया गया है। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह कार्रवाई फर्जी और अवैध नामों को हटाने के लिए की गई है।
निर्णायक साबित हो सकता है यह चरण
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर मतदान, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सियासी घमासान के बीच यह चरण चुनाव के अंतिम परिणामों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर मतदान, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सियासी घमासान के बीच यह चरण चुनाव के अंतिम परिणामों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
