April 25, 2026

सेहत का आसान योग: सर्वांगासन कैसे सुधारता है हार्मोन और डाइजेशन

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नई दिल्ली । आज की तेज़ रफ्तार और असंतुलित जीवनशैली में पाचन संबंधी समस्याएं और हार्मोनल असंतुलन आम हो गए हैं। कब्ज, अपच, ब्लोटिंग और थायरॉइड जैसी परेशानियां लोगों की सेहत को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, सर्वांगासन, जिसे शोल्डर स्टैंड भी कहा जाता है, शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी योगासन है, जो हार्मोन बैलेंस करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है।

सर्वांगासन को योग शास्त्र में “संपूर्ण शरीर का आसन” कहा गया है क्योंकि यह शरीर के लगभग हर हिस्से पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बेहतर होता है। जब शरीर में हार्मोन संतुलित रहते हैं, तो मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम करता है और शरीर की ऊर्जा भी बढ़ती है। खासतौर पर महिलाओं में यह आसन पीरियड्स की अनियमितता को सुधारने में सहायक माना जाता है।

इसके अलावा, सर्वांगासन पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इस आसन के दौरान पेट के अंग जैसे आंतें, लिवर, पैंक्रियास और पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे इनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। यह दबाव पाचन क्रिया को सक्रिय करता है और कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं को कम करता है। नियमित अभ्यास से पेट हल्का महसूस होता है और भोजन का पाचन बेहतर तरीके से होता है।

आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में सर्वांगासन को एंडोक्राइन सिस्टम को संतुलित करने और पाचन सुधारने वाला महत्वपूर्ण योगासन बताया गया है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से थकान कम होती है और शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है। साथ ही यह वजन नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वांगासन का अभ्यास सही तकनीक के साथ करना जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां जमीन की ओर हों। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। इस दौरान घुटनों को सीधा रखें और धीरे-धीरे नितंब और पीठ को ऊपर उठाते हुए शरीर का भार कंधों पर लाएं।

ठोड़ी को छाती से लगाने की कोशिश करें और हाथों से पीठ को सहारा दें। कोहनियां जमीन पर टिकी रहें। शरीर को सीधा रखते हुए पैरों को ऊपर की ओर रखें और इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक बने रहें। शुरुआती लोग कम समय से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं। इस दौरान सामान्य और गहरी सांस लेते रहना चाहिए।

अंत में धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में आएं और शरीर को आराम दें। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वांगासन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए। हालांकि, जिन लोगों को गर्दन में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था जैसी स्थिति है, उन्हें यह आसन बिना डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए।

नियमित अभ्यास से सर्वांगासन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित करता है और एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाता है।

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