राज्यसभा में NDA मजबूत, AAP सांसदों के दल-बदल से दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा गठबंधन
वर्तमान स्थिति के अनुसार राज्यसभा में कुल 244 सदस्य हैं और किसी भी पार्टी या गठबंधन को दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 163 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। हालिया बदलावों के बाद एनडीए के समर्थन में सांसदों की संख्या 145 तक पहुंच गई है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी आवश्यक बहुमत से 18 सीट दूर है, लेकिन इसे सत्ता पक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़त माना जा रहा है।
भाजपा की स्थिति भी इस घटनाक्रम के बाद मजबूत हुई है। पहले जहां पार्टी के पास 106 सांसद थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इसके अलावा कुछ मनोनीत सदस्यों और निर्दलीय सांसदों के समर्थन से यह आंकड़ा और बढ़कर करीब 122 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो सदन के कुल सदस्यों का लगभग आधा हिस्सा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहता है, तो आने वाले समय में सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में आसानी हो सकती है। विशेष रूप से वे संविधान संशोधन विधेयक, जिनके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, उन पर सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।
हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण झटका लगा था। उस समय सत्ता पक्ष दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था, जिससे यह विधेयक पारित नहीं हो पाया। अब राज्यसभा में बदलते समीकरणों को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में शामिल हुए सांसदों का विलय राज्यसभा में उनकी मूल पार्टी के संसदीय दल के दो-तिहाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व होने के कारण मान्य किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह सत्ता पक्ष की स्थिति को और मजबूत करेगा और सदन में उसकी पकड़ और अधिक प्रभावी हो जाएगी।
