धूल और गर्मी से एलर्जी व खांसी-जुकाम का बढ़ता खतरा, बदलते मौसम में रखें सावधानी
धूल और गर्मी कैसे बनती है बीमारी की वजह
गर्म मौसम में सड़कें सूख जाती हैं और वाहनों की आवाजाही से धूल लगातार हवा में फैलती रहती है। यह धूल जब सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है तो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है। इससे एलर्जी ट्रिगर होती है और लोगों को छींक, नाक बहना, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों पर इसका असर ज्यादा होता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग भी जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे लोगों में हल्की धूल भी गंभीर खांसी-जुकाम का कारण बन सकती है।
एलर्जी और जुकाम के सामान्य लक्षण
इस मौसम में सबसे आम लक्षणों में बार-बार छींक आना, नाक बंद या बहना, गले में खराश, आंखों में जलन और लगातार खांसी शामिल हैं। कई बार यह स्थिति बढ़कर सांस लेने में परेशानी और अस्थमा अटैक तक भी पहुंच सकती है।
बदलते मौसम में क्यों बढ़ती है समस्या
गर्मी के मौसम में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है और नाक-गला भी सूखने लगता है। ऐसे में धूल और बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। हवा में नमी कम होने के कारण एलर्जी फैलाने वाले कण ज्यादा देर तक वातावरण में बने रहते हैं।
बचाव के लिए क्या करें
डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस मौसम में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग जरूर करें। घर के अंदर नियमित सफाई रखें और धूल जमा न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। सुबह और शाम के समय ज्यादा धूल भरे इलाकों से बचना चाहिए।
कब लें डॉक्टर की सलाह
अगर खांसी-जुकाम 5–7 दिन से ज्यादा चले, सांस लेने में परेशानी हो या बुखार लगातार बना रहे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
