April 24, 2026

फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर घूम रहे दो आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार और जाली दस्तावेज किए बरामद

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नई दिल्ली:   राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें दो व्यक्तियों को फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को न्यायिक अधिकारी बताकर न केवल सरकारी पहचान का दुरुपयोग किया बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश भी की। यह कार्रवाई राजधानी में बढ़ती सुरक्षा सतर्कता के बीच की गई है, जहां संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान झांसी जिले के रहने वाले 31 वर्षीय सूर्या अग्रवाल और 21 वर्षीय निखिल यादव के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के सहारे खुद को प्रभावशाली और आधिकारिक पदों से जुड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई संसद मार्ग थाना क्षेत्र में उस समय की गई जब एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर शक हुआ और उसे रोककर जांच शुरू की गई।

जानकारी के अनुसार, एक एसयूवी वाहन बिना पंजीकरण नंबर प्लेट के चल रही थी और उस पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी, जो नियमों के खिलाफ है। वाहन पर न्यायिक अधिकारी से जुड़ा एक स्टिकर भी लगा हुआ था, जिससे संदेह और गहरा गया। इसी आधार पर पुलिस ने वाहन को रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया।

तलाशी में निखिल यादव के पास से एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए, जबकि सूर्या अग्रवाल के पास से पांच जिंदा कारतूस मिले। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि अग्रवाल खुद को वकील और एक सिविल जज के रूप में पेश कर रहा था। उसने एक न्यायिक पहचान पत्र और दिल्ली में हथियार ले जाने की अनुमति से जुड़ा एक दस्तावेज भी दिखाया, जिसे बाद में फर्जी पाया गया।

पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया में यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए पहचान पत्र और अनुमति पत्र पूरी तरह से जाली और डिजिटल रूप से बदले गए थे। हालांकि अग्रवाल के पास उत्तर प्रदेश में जारी एक वैध हथियार लाइसेंस था, लेकिन यह केवल उसी राज्य तक सीमित था और उसे दिल्ली में हथियार ले जाने की कोई अनुमति नहीं देता था। इस गंभीर अनियमितता के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने न केवल अवैध हथियार बल्कि फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध स्टिकर और संबंधित वाहन को भी जब्त कर लिया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे और खुद को प्रभावशाली पदों से जोड़कर पेश कर रहे थे।

पुलिस अब इस बात की जांच में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।

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