April 24, 2026

कालाष्टमी 2026: क्यों Kaal Bhairav ने Brahma का सिर काटा? कैसे बने ‘काशी के कोतवाल’

0
untitled-1775542223
नई दिल्ली। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव को समर्पित होती है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना से कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं, शत्रुओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, कार्यों में सफलता मिलती है और भय दूर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटा था। चलिए जानते हैं इस घटना के पीछे की कथा।

ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद
कथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि सृष्टि में सर्वोच्च कौन है। ब्रह्मा जी का दावा था कि वे सृजनकर्ता हैं, इसलिए सर्वोपरि हैं, जबकि विष्णु जी का मानना था कि पालनकर्ता होने के नाते उनका स्थान सर्वोच्च है।

ज्योतिर्लिंग की खोज में निकले ब्रह्मा और विष्णु
महादेव ने इस विवाद का समाधान करने के लिए स्वयं को अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया। इसका न कोई आरंभ था और न कोई अंत। दोनों देवताओं को शर्त दी गई कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का सिरा पहले खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। विष्णु जी वराह रूप धारण कर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले।

ब्रह्मा का अहंकार और काल भैरव का प्राकट्य
लंबी खोज के बाद भी विष्णु जी को सिर नहीं मिला और उन्होंने हार मान ली। लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा मिल गया। इसके साथ ही उनके पांचवें मुख से महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द निकले। इससे महादेव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए। काल भैरव ने अपने नाखून से पल भर में ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया।

काशी में मोक्ष और ‘कोतवाल’ का सम्मान
चूंकि काल भैरव ने सृष्टि के रचयिता का मस्तक काटा था, इसलिए उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटकते रहे। अंततः जब वे काशी पहुंचे, तो सिर अपने आप हाथ से गिर गया। तभी से काल भैरव को ‘काशी के कोतवाल’ के रूप में सम्मान मिला।

कालाष्टमी कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अप्रैल 2026 को है। दृक पंचांग के मुताबिक वैशाख कृष्ण अष्टमी की शुरुआत 9 अप्रैल को रात 9:19 बजे होगी और समाप्ति 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगी।

(Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों पर आधारित है।)

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *