April 24, 2026

मजबूत रबी फसल के बीच RBI का अनुमान, FY 2026-27 में महंगाई 4.6% रहेगी

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नई दिल्ली।देश में महंगाई को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। Reserve Bank of India (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत रबी फसल के चलते खाद्य आपूर्ति बेहतर रहेगी, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।

तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमान

आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है।

पहली तिमाही: 4.0%
दूसरी तिमाही: 4.4%
तीसरी तिमाही: 5.2%
चौथी तिमाही: 4.7%
यह संकेत देता है कि साल के बीच में महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर यह नियंत्रित दायरे में रहेगी।

रबी फसल से मिलेगी राहत

अच्छे रबी उत्पादन के कारण बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खाद्य कीमतों पर दबाव कम होगा। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

ऊर्जा कीमतें बनीं चिंता का कारण

Sanjay Malhotra ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्रीमियम पेट्रोल, एलपीजी और डीजल पर दिख रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव इस स्थिति को और जटिल बना सकता है।

कोर महंगाई भी नियंत्रण में

आरबीआई के अनुसार, कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) 2026-27 में करीब 4.4% रहने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि घरेलू मांग से जुड़ा महंगाई दबाव फिलहाल ज्यादा नहीं है।

मौसम और वैश्विक हालात से जोखिम

महंगाई के अनुमान के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं-

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी
संभावित एल नीनो जैसी मौसम स्थितियां
सप्लाई चेन में बाधाएं
ये सभी कारक भविष्य में महंगाई को बढ़ा सकते हैं।

अर्थव्यवस्था में बनी हुई है मजबूती

फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। निजी खपत और निवेश मांग आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आगे देखने को मिल सकता है।

“वेट एंड वॉच” की रणनीति

आरबीआई ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। Reserve Bank of India का कहना है कि मौजूदा स्थिति एक “सप्लाई शॉक” जैसी है, इसलिए बदलते हालात को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति सही रहेगी।

संतुलन बनाए रखने की चुनौती

मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मानना है कि महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत है और बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।

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