April 24, 2026

कालाढूंगी विधानसभा सीट 2027 : दावेदारों के बीच नए चेहरों पर भी हो रही चर्चा

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kaladhungi vidhansabha (1)

– राजनीतिक पार्टियों में खुद को मजबूत करने की लगी होड़

हल्द्वानी। उत्तराखंड के विधानसभा 2027 चुनावों को देखते हुए जहां उत्तराखंड में राजनीतिक पार्टियों के बीच खुद को ताकतवर दिखाने के लिए खींचतान शुरु हो गई है। ऐसे में तोड़फोड की राजनीति के बीच पार्टियों ने अपने पत्ते चलने तक शुरु कर दिए हैं व खुद को मजबूत करने में जुट गईं हैं।

वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टियों के द्वारा लिए गए अंदरुनी निर्णय जहां किसी पार्टी को अमृत पिलाने का काम सकते हैं, तो वहीं जरा सी चुक पार्टी को विष पीने के​ लिए भी मजबूर कर सकती हैं। इसी कोशिश के ​तहत राज्य की प्रमुख पार्टियां कुछ सख्त कदम उठाती दिख रही है।
ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि इसमें भी सबसे बड़ा निर्णयकारी फैसला तो जनता ही दिखाएगी, क्योंकि तोड़फोड़ या टिकट काटना या देना तो कुछ हद तक असर लाएगा। लेकिन सबसे बड़ा असर क्षेत्र की जनता किस नेता से नाराज है और किसे पसंद कर रही है वही स्थिति ​​पार्टी की जीत या हार का कारण बनेगी।

इन सबके बीच एक ओर कांग्रेस कुछ भाजपा नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करती दिख रही है, तो भाजपा के कुछ सख्त फैसले उसे दूरगामी लाभ दिलाते दिख रहे हैं। राज्य की ऐसे ही एक विधानसभा कालाढूंगी में भी इन दिनों सियासी हलचल ने रफ्तार पकड़ ली है। पोस्टरों की भरमार के बीच यहां के दावेदारों की लंबी सूची और सक्रियता जनता के बीच कर्द तरह के अहम सवाल पैदा कर रही है। यहां की जनता वर्तमान विधायक से काफी हद तक खफा दिख रही है, ऐसे में क्या इस बार पार्टी कुछ बदलाव करेगी और क्या सचमुच जनता के लिए खास कार्य कर रहे किसी व्यक्ति को चुनाव में उतार कर इस सीट को हाथ से निकलने से बचा सकेगी?

यह सवाल जनता के बीच इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि कुछ पुराने नेताओं को जिनसे उनके क्षेत्र की जनता नाराज है उन्हें पार्टियां साइड लाइन करती भी दिख रही है। दरअसल मौजूदा विधायक बंशीधर भगत, जो सात बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, इस बार असमंजस के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे में पु​त्र के लिए टिकट की मांगने से व पार्टी की लाइन को साइड में करने से उनका परिवारवाद का चेहरा जनता के सामने आ गया, जिससे वे चर्चा में आ गए और अब जनता उनकी इस मांग के बाद अत्यधिक नाराज होकर तरह के कमेंट कर रही है।

वहीं मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी अनदेखी और पार्टी के भीतर बदलते समीकरण संकेत देते हैं कि शीर्ष नेतृत्व इस सीट पर बदलाव का मन बना सकता है। भले ही भगत खुद चुनाव लड़ने व अपने बेटे को भी आगे बढ़ाने की बात कर चुके हैं, लेकिन यह साफ है कि इस बार राह पहले जैसी आसान नहीं दिख रही।

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कुल मिलाकर उत्तराखंड के प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में से एक कालाढूंगी विधानसभा पुराने नेता के कार्यों के चलते इस बार ढहता हुआ दिख रहा है, ऐसे में क्षेत्र में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं जनता में बनी हुई हैं। दरअसल विधायक बंशीधर भगत के इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के मुद्दे असंतोष का कारण बने हुए हैं। इस सीट को लेकर कई चेहरे सक्रिय हैं, तो वहीं अब तक दावा पेश नहीं करने वाले कुछ चेहरे भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कालाढूंगी विधानसभा – 4 चेहरों का अनुमान, वहीं 2 ऐसे भी जो अब तक खुलकर सामने नहीं आए…

1. बंसीधर भगत : वर्तमान में विधायक
ताकत: संगठन व क्षेत्र की अच्छी जानकारी : लंबे समय से विधायक।
कमजोरी: विकास कार्य नहीं होने से क्षेत्रीय जनता नाराज। पुत्र को टिकट देने की बात से सामने आया परिवारवाद का चेहरा।

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2. राजेंद्र सिंह बिष्ट: वर्तमान में प्रदेश उपाध्यक्ष
ताकत: संगठन का लंबा अनुभव : भाजपा के उपरी नेताओं से अच्छे संबंध।
कमजोरी: क्षेत्रीय जनता से सीधा जुडाव कम।

3. सुरेश भट्ट: वर्तमान में दर्जा राज्य मंत्री
ताकत: संगठन में काम का लंबा अनुभव : छात्र राजनीतिक से सक्रिय।
कमजोरी: जनता से कम जुडाव व जोश की कमी।

4. गजराज बिष्ट: वर्तमान में हल्द्वानी मेयर
ताकत: क्षेत्र में लंबे समय से जुड़ाव : प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं के काफी नजदीकी।
कमजोरी: संगठन व सत्ता में गुटबाजी के आरोप।

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मनोज पाठक व गुंजन तिवारी को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं तेज-

मनोज पाठक : भाजपा नेता
क्षेत्र में एक खास समर्थित ग्रुप। उत्तराखंड प्रांत का विस्तारक योजना 21-22 के प्रदेश संयोजक भी रहे। परंतु पिछले कुछ समय से बीमारी के चलते सक्रिय नहीं थे।

गुंजन तिवारी: क्षेत्र में उभरता चेहरा
लोगों की समस्याओं के निदान के लिए अपने संसाधनों से प्रयारत हैं। क्षेत्र की जनता से खास जुड़ाव, दूरदृष्टि के साथ अनुभव। लेकिन, क्षेत्र में अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं।

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