March 16, 2026

1 अप्रैल से बदलेगी मध्यप्रदेश में पेंशन व्यवस्था: SBI बनेगा एकमात्र एग्रीगेटर बैंक, जिला पेंशन कार्यालय होंगे बंद

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भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार राज्य के करीब साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को राहत देने के लिए पेंशन भुगतान की पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी जिसके तहत अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद उसी खाते में सीधे पेंशन मिल सकेगी। राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के उद्देश्य से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र ‘एग्रीगेटर बैंक’ नियुक्त किया है।

नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि सीधे SBI को हस्तांतरित करेगी। इसके बाद SBI नोडल एजेंसी के रूप में काम करते हुए सभी पेंशनभोगियों के खातों में पेंशन की राशि जमा करेगा चाहे उनका बैंक खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो। अभी तक पेंशन वितरण की प्रक्रिया में करीब 11 अलग-अलग बैंक शामिल थे लेकिन अब पूरा प्रबंधन और क्लेम प्रक्रिया सिर्फ SBI के माध्यम से होगी।

दरअसल मौजूदा पेंशन प्रणाली में कई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही थीं जिनकी वजह से पेंशनर्स को काफी परेशानी होती थी। कई मामलों में पेंशनभोगियों को उसी बैंक में खाता बनाए रखना पड़ता था जहां उनका वेतन खाता था। इसके अलावा महंगाई भत्ता बढ़ने या वेतनमान में संशोधन होने पर पेंशन अपडेट करने की प्रक्रिया भी काफी जटिल थी। यह काम सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से होता था और यह सुविधा केवल चार बड़े बैंकों में ही उपलब्ध थी। जिन बैंकों में यह सुविधा नहीं थी वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लग जाता था और पेंशनभोगियों को एरियर के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था।

पेंशन भुगतान में देरी की एक बड़ी वजह पेंशन अदायगी आदेश यानी PPO के हस्तांतरण में लगने वाला समय भी था। सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का PPO संबंधित बैंक को भेजा जाता था लेकिन समन्वय की कमी के कारण कई बार रिटायरमेंट के बाद भी पेंशन शुरू होने में देरी हो जाती थी। इसके अलावा वेतनमान फिक्सेशन में मामूली त्रुटियां भी पेंशन प्रक्रिया को महीनों तक रोक देती थीं।

पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी ने मौजूदा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है। उनके अनुसार जिला और संभागीय पेंशन कार्यालयों में कई बार कर्मचारियों द्वारा पेंशन प्रकरणों में बार-बार आपत्तियां लगाई जाती हैं जिससे रिटायर्ड कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ता है और कई मामलों में रिश्वत की शिकायतें भी सामने आती हैं।

इसी समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में संचालित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा जबकि संभागीय मुख्यालयों के कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। अब पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। नई व्यवस्था में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन फाइल किस अधिकारी के पास है जिससे स्थानीय स्तर पर दबाव और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।

इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए SBI ने भी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में राज्य में करीब 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं और इस वर्ष लगभग 22 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। बैंक ने अन्य 10 बैंकों से दो लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है जिसे पूरा होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के करीब 22.5 लाख बुजुर्ग विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए केंद्र से निराशाजनक खबर आई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में फिलहाल किसी प्रकार की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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