रहस्यमयी बुढ़िया माई मंदिर: अनहोनी से पहले मिलती है चेतावनी, कुसम्ही जंगल में आस्था का अद्भुत केंद्र
बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर शहर से लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर कुसम्ही जंगल के भीतर स्थित है। जंगल के बीच होने के बावजूद नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर दराज से भक्त यहां मां के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और संकटों से रक्षा करती हैं। कई श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि मां की कृपा से अकाल मृत्यु जैसे बड़े संकट भी टल सकते हैं इसलिए इस मंदिर को सिद्धपीठ के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा भी इसकी रहस्यमयी पहचान को और मजबूत करती है। बताया जाता है कि बहुत समय पहले इस स्थान पर एक बड़ा नाला हुआ करता था जिस पर लकड़ी का एक पुल बनाया गया था। एक दिन एक बारात इसी रास्ते से गुजर रही थी। जब बारात पुल के पास पहुंची तो वहां खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने बारातियों को पुल पर जाने से मना करते हुए चेतावनी दी। हालांकि बारातियों ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और पुल पार करने लगे। जैसे ही बारात पुल के बीच पहुंची वह अचानक टूट गया और अधिकांश बाराती नाले में गिर गए। इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों को एहसास हुआ कि वह बुजुर्ग महिला साधारण इंसान नहीं बल्कि देवी का रूप थीं जिन्होंने पहले ही खतरे की चेतावनी दी थी।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उस स्थान को पवित्र मानते हुए वहां पूजा अर्चना शुरू कर दी। धीरे धीरे यह स्थान बुढ़िया माई मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया और समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी होती चली गई। आज भी कई लोग मानते हैं कि मां अपने भक्तों को संकट आने से पहले संकेत देती हैं और उन्हें बड़े हादसों से बचाती हैं।
नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा भंडारा और धार्मिक आयोजनों का भी आयोजन किया जाता है। जंगल के बीच स्थित यह मंदिर भले ही रहस्यमयी कथाओं से जुड़ा हो लेकिन भक्तों के लिए यह आस्था विश्वास और शक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
