बाजार नियामक में बदलाव, K. V. Ramana Murthy को Securities and Exchange Board of India का फुल-टाइम मेंबर नियुक्त किया गया
मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने दी मंजूरी
सरकार के बयान के अनुसार, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने के.वी. रमना मूर्ति की नियुक्ति को तीन साल की अवधि या अगले आदेश तक के लिए स्वीकृत दी है। सेबी में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी भूमिका, पूंजी बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत सुझावों, नियामक निगरानी और जांच दिशानिर्देशों में अहम होगी। इससे पहले मूर्ति रक्षा लेखा तंत्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वे प्रोडक्शनल कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स जैसे प्रमुख पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
पहले भी सेबी बोर्ड से जुड़े रहे हैं मूर्ति
के.वी. रमना मूर्ति का सेबी से कार्य पहले से रहा है। इससे पहले वे मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के प्रतिनिधि के रूप में सेबी बोर्ड में अंशकालिक सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके पास सरकारी वित्तीय प्रबंधन और नियामक उद्देश्यों का लंबा अनुभव है, जिसे अब पूंजी बाजार के नियमन और विकास में उपयोग किया जाएगा।
सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या हुई चार
रमना मूर्ति की नियुक्ति के साथ सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। पिछले वर्ष कुछ पद खाली होने के बाद बोर्ड में यह महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। सेबी के अन्य पूर्णकालिक सदस्यों में कमलेश चंद्र वार्ष्णेय और संदीप प्रधान शामिल हैं, जो भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) कैडर से आते हैं। इसके अलावा अमरजीत सिंह भी पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने सेबी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।
सेबी बोर्ड की संरचना
सेबी के बोर्ड की संरचना में एक अध्यक्ष, चार पूर्णकालिक सदस्य और चार पूर्णकालिक सदस्य होते हैं। वर्तमान में सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे हैं, जिन्होंने 1 मार्च 2025 को यह पदभार संभाला था। अंशकालिक सदस्यों में दीप्ति गौड़ मुखर्जी, अनुराधा ठाकुर, शिरीष चंद्र मुर्मू और एन. वेंकटराम शामिल हैं। ये सदस्य विभिन्न मंत्रालयों और स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे नियामक प्रक्रिया में व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है।
कैपिटल बाजार के विकास में अहम भूमिका
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य देश केकैपिटल बाजार के विकास, निकायों के हितों की रक्षा और वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे नीतिगत आशाजनक, बाजार निगरानी और जांच से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
इस बीच सेबी अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) भारत के कैपिटल बाजार के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फंड डीटीएच ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
