शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, BSE Sensex और Nifty 50 लाल निशान में
सेंसेक्स और निफ्टी में करीब एक प्रतिशत की गिरावट
शुक्रवार सुबह करीब 11:40 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 निफ्टी वाला सेंसेक्स 706 अंक यानी 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,334 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 240 अंक यानी 1.02 प्रतिशत टूटकर 23,398 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट का दायरा व्यापक रहा और कई प्रमुख सेक्टरों में तेजी से बिकवाली देखी गई। मेटल, डिफेंस, ऑटो और पीएसयू बैंक से जुड़े सप्लाई में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का समग्र सेंटिमेंट कमजोर हो गया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति टमाटर के करीब पहुंच गई हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मज में संभावित बाधाओं के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस वजह से डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति टमाटर और ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति टमाटर के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी से आर्थिक दृष्टि से चिंता का विषय मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक सेंसेक्स की कमजोरी का भी पड़ा असर
भारतीय बाजार पर वैश्विक सेंसेक्स का भी नेगेटिव असर देखने को मिला। एशियाई सेंसेक्स में भी शुक्रवार को कमजोरी का माहौल रहा। सियोल, टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता के प्रमुख शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वैश्विक सेंसेक्स में इस कमजोरी ने सेंसेक्स के मान्य को प्रभावित किया, जिसका असर भारतीय सेंसेक्स पर भी साफ दिखाई दिया।
विदेशी सेंसेक्स की बिकवाली से बढ़ा दबाव
भारतीय बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी सेंसेक्स की लगातार बिकवाली भी है। एक्सचेंज के आंकड़ों के हिसाब से विदेशी सेंसेक्स ने गुरुवार को ही 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए थे। मार्च महीने में अब तक एफआईआई भारतीय बाजार से 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। लगातार हो रही इस बिकवाली से बाजार में तरलता पर असर पड़ रहा है और सेंसेक्स का भरोसा भी कमजोर हो रहा है।
रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर बढ़ता दबाव भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। शुक्रवार के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 92.60 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। कमजोर होता रुपया विदेशी फर्मों के लिए जोखिम बढ़ता है, जिससे वे भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें घट स्तर पर बनी रहती हैं और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता जारी रहती है, तो निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।
