March 12, 2026

Iran-US-Israel War: ईरान ने भारत को कहा “शुक्रिया”, मानवीय मदद के लिए सराहा

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष के बीच भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण सराहना मिली है। ईरान ने खुलकर भारत का धन्यवाद किया। यह घटना 20 फरवरी 2026 को शुरू हुई जब ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Lavan को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उसे तत्काल मदद की जरूरत थी।

भारत ने तुरंत दिया मानवीय सहयोग
ईरानी युद्धपोत ने भारत से कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी। भारत ने बिना किसी देरी के इस मानवीय अनुरोध को स्वीकार कर लिया। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि ईरान ने अपने जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति 20 फरवरी को मांगी थी, जिसे 1 मार्च 2026 को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद 4 मार्च 2026 को IRIS Lavan कोच्चि पोर्ट पर पहुंचा।

जहाज का क्रू फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में सुरक्षित रूप से मौजूद है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि यह कदम केवल मानवीय और दोस्ताना सहयोग के तहत किया गया है।

ईरान ने जताया आभार
ईरानी अधिकारियों ने भारत के इस कदम को दोस्ताना और मानवीय सहयोग बताते हुए आभार व्यक्त किया। यह कदम ऐसे समय में आया जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष और तनाव का माहौल लगातार बढ़ रहा था, खासकर अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के विवाद के चलते।

भारत की कूटनीतिक नीति
भारत ने साफ किया है कि वह मौजूदा हालात में शांति, बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव को कम करने का पक्षधर है। इस कदम से यह संदेश भी गया कि भारत वैश्विक मानवीय मूल्यों और सुरक्षा का समर्थन करता है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवादों में सीधा भागीदारी से बचता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
अमेरिका ने हाल ही में ईरान के एक युद्धपोत को समुद्र में निशाना बनाया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। ऐसे समय में भारत की मदद ने ईरान के जहाज और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक संवेदनशीलता और तटस्थ नीति को उजागर करती है।

कोच्चि पोर्ट का महत्व
कोच्चि बंदरगाह इस प्रकार के मानवीय और तकनीकी सहयोग के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और पोर्ट अथॉरिटीज़ ने जहाज और उसके क्रू के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराई। यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता क्षमताओं को भी दर्शाता है।

ईरान का भारत को धन्यवाद कहना केवल एक मानवीय सहयोग की घटना नहीं है, बल्कि यह मिडिल ईस्ट में भारत की संतुलित कूटनीति और भरोसेमंद भूमिका को भी दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि शांति और बातचीत के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करना भारत की प्राथमिकता है।

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