आखिर क्यों महादेव ने काटा ब्रह्मा जी का पांचवां सिर? सृष्टि के रचयिता की एक भूल और पौराणिक कथा का रहस्य
इस कथा का उल्लेख Shiva Purana में मिलता है। इसके अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा जी ने Satarupa नाम की एक अत्यंत सुंदर स्त्री की रचना की। सतरूपा अत्यंत तेजस्वी और मनमोहक रूप वाली थीं। कथा के अनुसार उनके सौंदर्य को देखकर स्वयं ब्रह्मा जी भी आकर्षित हो गए।
बताया जाता है कि जब सतरूपा को यह आभास हुआ कि ब्रह्मा जी की दृष्टि उन पर है, तो उन्होंने उनसे बचने के लिए अलग-अलग दिशाओं में जाना शुरू कर दिया। सतरूपा जब जिस दिशा में जातीं, ब्रह्मा जी उन्हें देखने के लिए उसी दिशा में अपना एक मुख प्रकट कर लेते। इस तरह उन्होंने चारों दिशाओं में देखने के लिए चार मुख बना लिए। लेकिन जब सतरूपा आकाश की ओर बढ़ीं, तब ब्रह्मा जी ने ऊपर की ओर देखने के लिए अपना पांचवां मुख भी प्रकट कर लिया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह आचरण मर्यादा के विरुद्ध माना गया, क्योंकि सतरूपा उनकी ही रचना थीं और उन्हें मानस पुत्री के समान माना जाता था। यह सब देखकर Shiva अत्यंत क्रोधित हो गए। धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए उन्होंने अपने उग्र स्वरूप Kala Bhairava को प्रकट किया और ब्रह्मा जी को दंड देने का आदेश दिया।
महादेव के आदेश पर काल भैरव ने तुरंत ब्रह्मा जी के उस पांचवें सिर को काट दिया, जो ऊपर की ओर था। इसी घटना के बाद से ब्रह्मा जी के केवल चार मुख ही रह गए और वे चतुर्मुख रूप में ही जाने जाने लगे। बाद में ब्रह्मा जी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस घटना का एक और प्रभाव यह भी माना जाता है कि ब्रह्मा जी की पूजा अन्य देवताओं की तुलना में बहुत कम होती है। कहा जाता है कि बाद में Saraswati के श्राप के कारण भी उनकी व्यापक पूजा नहीं हो पाई।
हालांकि भारत में एक ऐसा स्थान है जहां ब्रह्मा जी का प्रमुख और प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा मंदिर में है, जो पुष्कर, राजस्थान में स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मा जी के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस तरह यह पौराणिक कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग ही नहीं, बल्कि मर्यादा, संयम और धर्म के महत्व का संदेश भी देती है।
