March 9, 2026

मुरैना में 'खाकी' का खूनी रूप: मामूली विवाद में SAF जवान ने सगे चाचा को मारी गोली, हालत नाजुक

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रिश्तों के कत्ल की एक सनसनीखेज कोशिश सामने आई है। सुमावली थाना क्षेत्र के पावली गांव में शुक्रवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मुरैना की पांचवीं बटालियन में पदस्थ एसएएफ (SAF) जवान रवि गुर्जर ने अपने ही सगे चाचा राजू गुर्जर पर कट्टे से फायर कर दिया। यह घटना न केवल पारिवारिक कलह, बल्कि वर्दी की आड़ में पनप रहे हिंसक आक्रोश का भी नतीजा है।

विवाद की जड़: बंटवारा और पुरानी रंजिश
पुलिस और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, पावली गांव के दो सगे भाइयों—गंभीर गुर्जर और राजू गुर्जर के बीच कुछ समय पहले ही संपत्ति का बंटवारा हुआ था। बंटवारे के बाद दोनों के परिवार अलग-अलग घरों में रह रहे थे, लेकिन गंभीर गुर्जर के बेटे (जवान रवि गुर्जर) और उसके चाचा राजू के बीच अक्सर अनबन रहती थी।

शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे किसी मामूली बात को लेकर चाचा-भतीजे के बीच बहस शुरू हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि गाली-गलौज होने लगी।

अंधाधुंध फायरिंग: इसी बीच रवि गुर्जर ने आपा खो दिया और कट्टा निकालकर चाचा राजू की जांघ पर गोली मार दी। गोली लगते ही राजू लहूलुहान होकर गिर पड़े।

अस्पताल में जंग और फरार ‘रक्षक’
गोलीकांड के बाद आरोपी जवान मौके से फरार हो गया। परिजनों ने आनन-फानन में घायल राजू गुर्जर को जिला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया है। फिलहाल राजू की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

पुलिस की कार्रवाई: बटालियन को लिखा जाएगा पत्र
सुमावली थाना प्रभारी के अनुसार, पुलिस की एक टीम घायल के बयान दर्ज करने के लिए ग्वालियर रवाना हो गई है।
FIR की तैयारी: घायल के बयानों के आधार पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा।
विभागीय कार्रवाई: चूंकि आरोपी रवि गुर्जर SAF की पांचवीं बटालियन में पदस्थ है, इसलिए पुलिस विभाग की ओर से बटालियन को औपचारिक पत्र लिखकर उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी की जाएगी। आरोपी जवान की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

वर्दी अनुशासन सिखाती है, लेकिन जब वही हाथ अपने ही अपनों के खून से सन जाएं, तो सवाल गहरे हो जाते हैं। मुरैना की यह घटना दिखाती है कि जमीनी विवाद और आपसी मनमुटाव किसी भी हद तक जा सकते हैं।

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