230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण
तीन साल से वन भूमि पर जारी अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने 27 फरवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन हालात फिर वहीं के वहीं नजर आ रहे हैं। वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने उस दिन मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया था। कार्रवाई में वन विभाग के एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, तहसीलदार कीर्ति प्रधान, एसडीओपी महेंद्र चौहान और थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर मौजूद रहे। करीब 230 वनकर्मी, पुलिस जवान और राजस्व अमले ने मिलकर अवैध कब्जे हटाए थे।
कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई अस्थायी टपरियों को तोड़ा गया और जमीन को दोबारा खेती या कब्जे से बचाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे भी खोदे गए थे। प्रशासन का मकसद साफ था—वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर भविष्य में दोबारा कब्जा न होने देना। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि अब दोबारा यहां कब्जा नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी।
लेकिन कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। उसी जमीन पर फिर से टपरियां खड़ी कर दी गई हैं। इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों के हौसले अब भी बुलंद हैं और प्रशासनिक सख्ती का असर लंबे समय तक नहीं टिक पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लगातार निगरानी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वन भूमि पर कब्जे का सिलसिला फिर से बढ़ सकता है।
यह सवाल भी उठ रहा है कि जब इतनी बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई थी, तो उसके बाद क्षेत्र की निगरानी क्यों कमजोर पड़ गई। वन भूमि पर बार-बार कब्जा होना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन दोबारा सख्ती दिखाता है या अतिक्रमण का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
