March 8, 2026

चंद्रग्रहण के चलते हरिद्वार में मंदिरों के कपाट बंद:12 घंटे पहले सूतक लागू

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chandra grahan - Ghat 02
  • घाटों पर सन्नाटा; रात 8 बजे होगी विशेष गंगा आरती

चंद्रग्रहण के चलते हरिद्वार में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। 12 घंटे पहले सूतक लागू होते ही सुबह 6:20 बजे विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी सहित शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए। आम दिनों में जहां घाटों पर तड़के से भीड़ उमड़ती है, वहीं सूतक लगते ही सन्नाटा पसर गया। अब ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण के उपरांत रात 8 बजे विशेष गंगा आरती आयोजित की जाएगी।

मंगलवार को धर्मनगरी में विशेष धार्मिक व्यवस्थाएं देखने को मिलीं। प्रातःकालीन गंगा आरती रोज की तरह संपन्न हुई, लेकिन उसके तुरंत बाद ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए दर्शन पर रोक लगा दी गई। आम दिनों में सुबह-सुबह हर की पौड़ी पर भारी भीड़ रहती है, जबकि आज श्रद्धालुओं ने घरों में रहकर ही पूजा-पाठ करना उचित समझा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। ग्रहण का शयनकाल प्रातः 6 बजकर 17 मिनट से माना गया, इसी परंपरा का पालन करते हुए 6:20 बजे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।

स्थानीय पुजारियों के अनुसार, सूतक काल में पूजा-अर्चना, मूर्ति स्पर्श या किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते।

ग्रहण समाप्ति के बाद होगा शुद्धिकरण
हरिद्वार के पुजारी कुमार स्वामी ने बताया कि चंद्र ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लागू हो जाता है, इसलिए प्रातःकाल मंदिरों को बंद करना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों को विधि-विधान से शुद्ध किया जाएगा।

वहीं पुजारी विश्व बंधु शर्मा बाली ने जानकारी दी कि शाम 7:45 बजे तक ग्रहण का प्रभाव रहेगा। इसके बाद भगवान को गंगाजल से स्नान कराया जाएगा, चंदन एवं विशेष पूजन किया जाएगा।

तय समय के बाद ही दर्शन को पहुंचने की अपील
ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रात्रि 8 बजे गंगा आरती संपन्न होगी। इसके साथ ही मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोल दिए जाएंगे।

मंदिर प्रबंधन और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय के बाद ही दर्शन के लिए पहुंचे।

घाटों पर सन्नाटा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम


सुबह से ही हर की पौड़ी और आसपास के गंगा घाटों पर सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम भीड़ देखने को मिली। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि ग्रहण समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

आस्था और परंपरा का पालन
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ स्थगित रहता है, जबकि ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व होता है।

धर्मनगरी हरिद्वार में हर बार की तरह इस बार भी सूतक और ग्रहण काल का पालन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। ग्रहण समाप्ति के बाद श्रद्धालु एक बार फिर गंगा स्नान और आरती में शामिल हो सकेंगे।

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