March 8, 2026

केरलम की मंजूरी के बाद ममता ने फिर उठाई नाम बदलने की मांग

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कोलकाता। केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ किए जाने के फैसले के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के नाम‑परिवर्तन की मांग को पूरा नहीं करने को लेकर केंद्र पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने के प्रस्ताव को केंद्र ने वर्षों से लंबित रखा है, जबकि केरल को तुरंत मंजूरी दे दी गई. ममता ने एक कार्यक्रम में कहा कि राज्य का नाम ‘West Bengal’ होने की वजह से पूरे देश में अल्फाबेटिकल ऑर्डर में बंगाल को हमेशा अंत में रखा जाता है. चाहे वह परीक्षाओं के इंटरव्यू हों, राष्ट्रीय बैठकें हों या औपचारिक कार्यक्रम. उन्होंने कहा कि “हमारे छात्र जब परीक्षा या इंटरव्यू में जाते हैं तो उन्हें आख़िर में बुलाया जाता है. मुझे भी राष्ट्रीय बैठकों में सबसे अंत में बोलने का अवसर मिलता है, क्योंकि हमारे राज्य का नाम ‘W’ से शुरू होता है.”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल के प्रति “अनदेखी” का रवैया अपनाती है। उन्होंने दावा किया कि राज्य विधानसभा 2018 से अब तक तीन बार नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है, लेकिन केंद्र ने उसे आगे नहीं बढ़ाया.
बंगाल की मांग को अटकाया जा रहा है: ममता बनर्जी

ममता ने केरल को बधाई देते हुए कहा कि केरलम का प्रस्ताव आसानी से पास होना “राजनीतिक समीकरणों” का नतीजा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और सीपीआई(एम) की “बढ़ती समझ” ने इस प्रक्रिया को आसान बनाया, जबकि बंगाल की मांग लगातार अटकी हुई है.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बंगाल के लिए ‘बांग्ला’ नाम उनकी सांस्कृतिक पहचान, भाषा और इतिहास को बेहतर तरीके से दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि ‘West’ शब्द विभाजन के दौर की ऐतिहासिक परिस्थितियों का बोझ ढोता है, जबकि आज ‘East Bengal’ अस्तित्व में ही नहीं है. कई विशेषज्ञों ने भी इस तर्क का समर्थन किया है कि ‘बांग्ला’ राज्य की आधुनिक और सांस्कृतिक पहचान के अधिक नज़दीक है.
केंद्र पर ममता ने बोला हमला

ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से यह मुद्दा उठाया, लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई. उन्होंने केंद्र पर “एंटी‑बंगाली” रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया और कहा कि जब राजनीतिक परिस्थितियाँ बदलेंगी, तो राज्य का नाम बदलने का रास्ता भी साफ होगा.

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