March 8, 2026

होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

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नई दिल्ली:होलाष्टक 2026 की शुरुआत सोमवार से हो गई है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार होली से पूर्व आने वाले ये आठ दिन विशेष ज्योतिषीय महत्व रखते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में नवग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिसके कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित करने की परंपरा रही है।

इस वर्ष राहु और मंगल की युति से बन रहा अंगारक योग होलाष्टक के प्रभाव को और संवेदनशील बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक अलग-अलग तिथियों में चंद्रमा, सूर्य, शनि, गुरु, बुध, शुक्र, मंगल और राहु क्रमशः प्रतिकूल प्रभाव में माने जाते हैं। यही कारण है कि इस समय को संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का काल कहा गया है।

इन 5 राशियों पर विशेष प्रभाव
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मिथुन, कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि के जातकों पर होलाष्टक का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखा जा सकता है।

मिथुन राशि के लिए आर्थिक अस्थिरता और मानसिक भ्रम की स्थिति बन सकती है। निवेश और बड़े वित्तीय निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

कर्क राशि के जातकों को वाहन चलाते समय सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में भी धैर्य रखने की सलाह है।

सिंह राशि वालों के लिए पारिवारिक संबंधों में तनाव की संभावना जताई गई है, विशेषकर पिता या वरिष्ठ सदस्यों से मतभेद हो सकते हैं।

कुंभ राशि में राहु और मंगल की युति से बना अंगारक योग करियर और निजी जीवन में दबाव की स्थिति ला सकता है। कार्यस्थल पर विवाद से बचने और संयमित व्यवहार रखने की सलाह दी गई है।

मीन राशि के जातकों को निर्णय लेने में असमंजस और मानसिक अस्थिरता का अनुभव हो सकता है। इस दौरान जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम न उठाने की सलाह दी गई है।

शुभ कार्यों पर पारंपरिक विराम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को टालना चाहिए। हालांकि दैनिक पूजा, जप, दान और साधना को सकारात्मक माना गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह अवधि आत्ममंथन और आध्यात्मिक उन्नति का समय है। शिव स्तुति, सूर्य उपासना, हनुमान चालीसा का पाठ और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना इस समय शुभ फलदायी माना जाता है।

आध्यात्मिक संदेश
होलाष्टक को केवल अशुभ समय के रूप में देखने के बजाय इसे आत्मचिंतन और आत्मसंयम के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। संयमित जीवन, सकारात्मक सोच और धैर्य के साथ यह अवधि भी शुभ परिणाम दे सकती है।

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