Good News: हिंदुओं की संख्या 1.2 अरब पार, आखिर किस वजह से बढ़ रही है इतनी तेजी?

Hindu Population Growth: अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट ‘2010 से 2020 तक दुनिया भर में कैसे बदला धार्मिक परिदृश्य’ के अनुसार 2010 से 2020 के बीच दुनिया में हिंदुओं की संख्या लगभग 1.07 अरब से बढ़कर 1.2 अरब हो गई। करीब 12 प्रतिशत की यह वृद्धि लगभग उतनी ही है, जितनी इस दशक में विश्व की कुल आबादी बढ़ी। जहां ईसाइयत की हिस्सेदारी घटी और इस्लाम की बढ़ी, वहीं हिंदू धर्म ने अपनी जनसांख्यिकीय निरंतरता को बनाए रखा।
नतीजा यह है कि वैश्विक आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत पर स्थिर रही, इसमें न तेज उछाल आई, न गिरावट। रिपोर्ट के अनुसार 21वीं सदी के धार्मिक बदलावों के बीच हिंदू धर्म की कहानी उथल-पुथल की नहीं, बल्कि निरंतरता और स्थिरता की है।
धर्मांतरण से नहीं, जन्म से बढ़त
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि हिंदू आबादी में बदलाव का मुख्य कारण जन्म दर है, न कि धर्मांतरण। अन्य बड़े धर्मों की तुलना में हिंदू समुदाय में धर्म बदलने की दर काफी कम है। यह दुनिया का सबसे भौगोलिक रूप से केंद्रित बड़ा धर्म है। लगभग 99 प्रतिशत हिंदू एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रहते हैं और करीब 95 प्रतिशत सिर्फ एक देश भारत में। शेष बड़ी आबादी नेपाल में है। यानी हिंदू जनसांख्यिकी की दिशा लगभग पूरी तरह भारत की सामाजिक और जनसंख्या नीतियों से तय होती है।
बहुसंख्यक होने की बड़ी पहचान
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग 97 प्रतिशत हिंदू ऐसे देशों में रहते हैं जहां वे बहुसंख्यक हैं, मुख्यतः भारत और नेपाल में। यह अनुपात अन्य बड़े धर्मों से कहीं अधिक है, जिनकी बड़ी आबादी विभिन्न देशों में अल्पसंख्यक रूप में फैली हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार जैसे-जैसे भारत की जनसंख्या स्थिर होगी और औसत आयु बढ़ेगी, वैसे-वैसे हिंदू आबादी की वृद्धि दर धीमी पड़ेगी लेकिन कुल संख्या में बढ़ोतरी जारी रहेगी।
युवाओं का आधार और स्थिर रफ्तार
भारत की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, जो यूरोप की 40 वर्ष से अधिक औसत आयु से काफी कम है। अधिकांश हिंदू भारत में हैं, इसलिए वैश्विक हिंदू आबादी भी अपेक्षाकृत युवा है। हालांकि, भारत में प्रजनन दर पिछले दशकों में तेजी से घटी है, फिर भी रिपोर्ट के अनुसार बड़ी युवा आबादी आने वाले वर्षों में कुल संख्या को बढ़ाती रहेगी।
