March 8, 2026

पुराने नेता नहीं नए विजन वाले लोग चाहिए, जो उत्तराखंड को आगे ले जाने में सक्षम हों

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uttarakhand politics

– इस बार का चुनाव 2027 होगा बेहद खास, एक भी गलती पार्टियों को पड़ेगी बेहद भारी

उत्तराखंड जिसका एक नाम देवताओं की भूमि भी है, आज वो कराह रहा है। प्रदेश निर्माण के समय जो सपने देखे गए थे, वे न तो अब तक पूरे हो सके हैं, और न ही (यहीं स्थिति रही तो) पूरे होते हुए दिख रहे हैं।

इन समस्याओं के बीच अनेक राजनीति के जानकारों का कहना है कि इसका कारण यहां के नेताओं में विजन की कमी को दिखाता है। यहां की समस्याओं से निपटने में अक्षम व प्लान की कमी न केवल उत्तराखंड को लगातार पीछे धकेल रही है। बल्कि बिना समस्याओं के समाधान को जाने, किए जाने वाले कार्य लोगों के लिए आसानी की जगह मुश्किल पैदा कर रहे हैं। कुल मिलाकर केवल दिखावे (जनता को संतुष्ट करने) के कार्य, यहां की भोली भाली जनता को मुर्ख बनाने के लिए किए जाते हुए माने जा सकते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उत्तराखंड में इस बार भी वहीं लोग वापस चुनाव मैदान मे आएंगे? जो पहले भी आ चुके हैं और जिनके पास भविष्य का न तो कोई रोडमैप है न विजन। प्रदेश की जनता को इस संबंध में जागरुक रहने की आवश्यकता है। कि क्या वहीं पुराने नेता जो लगातार चुनाव जीतते जा रहे हैं या लड़ते रहे हैं, वे उनकी समस्याओं का निदान इतने वर्षों में कर सके? यदि नहीं तो क्या इस बार भी वे आपकी समस्याओं का कोई निराकरण कर सकेंगे। या देवभूमि को अब उन नए लोगों को लाने की जरूरत है, जो समाज की पीड़ा को अपनी पीड़ा मानते हों और जिनके पास यहां की समस्याओं के निपटारे को लेकर कोई रोडमैप तो हो ही साथ ही विजन भी हो। ऐसे में उनकी तो कतई जरूरत नहीं है, जो अपने बाद बिना विजन की अपनी पीड़ियों को आगे बढ़ाना चाहते हो।

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विजन होता तो…
राजनीति के विशेष जानकारों का तो यहां तक मानना है कि उत्तराखंड को एक सफल प्रदेश बनाने व उचाईयों तक ले जाने के लिए नए विजन वाले लोगों की खास आवश्यकता है। जो समाज से जुड़े हो और अभी भी समाज की समस्याओं को हल करने के लिए लोगों की मदद कर रहे हों। ऐसे लोग यदि प्रदेश की राजनीति में आएंगे तो वे अपने विजन की मदद से न केवल प्रदेश की जनता की समस्याओं का हल कर उनका दिल जीतेंगे बल्कि अपनी पार्टी को भी मजबूत बनाएंगे। यहां ये भी समझ लें कि यदि पुराने नेताओं का विजन इतना ही धारदार होता तो वे कबके पुरानी समस्याएं जो वर्षों से चली आ रही हैं, उनका समाधान कर देते। ऐसे में वर्तमान की जरूरत को देखते हुए प्रदेश की पार्टियों को नए विजन वाले लोगों को आगे बढ़ाना ही प्रदेश को आगे बढ़ने में खास सहयोग करेगा।

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जनता क्या चाहती है?
दरअसल उत्तराखंड में विशेषकर देहरादून,हल्द्वानी व रुद्रपुर को लेकर राजनैतिक दलों को समझना होगा कि यहां के रहवासियों में सुरक्षा और व्यवस्था का एहसास दिलाने वाले मजबूत नेता की लालसा बढ़नी शुरु हो गई है। ऐसे में यहां की जनता एक ऐसे नेता चाहती है, जिसमें एक ओर जहां आम लोगों से जुड़ने की क्षमता हो, तो वहीं वह उनके स्तर तक आने में सक्षम होने के साथ ही समाज के प्रति अच्छी भावना के अलावा उसके पास क्षेत्र की समस्याओं के निदान का कोई विशेष विजन व क्षेत्र के विकास के लिए रोडमैप हो।

समाज को कुछ देने की क्षमता वाला व्यक्ति ही अब यहां की जनता का दिल जीतता दिख रहा है। हल्द्वानी, रुद्रपुर सहित उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में जनता अब पुराने नेताओं की ओर रुख करने से कटती हुई दिख रही है। सूत्र तो बताते हैं कि इन बातों से लगभग सभी पार्टियां अवगत हैं, लेकिन पहले से जमे हुए नेता इन बातों को उपर (आलाकमान) तक पहुंचने ही नहीं देते, और किसी न किसी तरह अपनी स्थिति की मजबूती का फायदा उठाकर अपनी सीट को कैसे भी पकड़े रहना चाहते हैं।

जागरुक होती जनता
प्रदेश के विभिन्न जिलों से जागरुक होते लोगों का कहना है कई पुराने नेता केवल अपने वर्चस्व को बचाने के लिए मैदान में उतरते हैं। और जीत के बाद क्षेत्र की समस्याओं को लेक​र बिना किसी प्लान के कई बातें तो कहते हैं, लेकिन समस्याओं का निदान अपने पूरे कार्य​काल में तक नहीं कर पाते, जिसके प्रमाण प्रदेश के कई जिलों में आज भी मौजूद हैं।

उत्तराखंड में नए विजन के साथ सामने क्यों नहीं आ पाते लोग?
प्रदेश को लेकर कई जानकारों का मानना है कि यह दुर्भाग्य ही है कि यहां नए विजन से लैस लोगों को उनकी क्षमताओं के बावजूद आगे नहीं आने दिया जाता। जबकि लंबे समय से नेताओं द्वारा केवल लुभावने सपने दिखाकर ठगी जा रही प्रदेश की जनता का इस बार मूड कुछ ओर ही दिख रहा है। राज्य के अनेक जागरुक लोगों को कहना है कि यहां कुछ नेता तो केवल खुद की जीत या अपने परिवार को आगे बढ़ाने में जुटे दिखते हैं, जिसके चलते वो स्पष्ट विजन वाले नए लोगों को आगे ही नहीं बढ़ने देते। इसी व्यवहार के चलते वे नए लोग जो देश भर में रहकर अनेक चीजों को सीखे (इनके पास जनता की हर समस्या का निराकरण भी है) हैं, जब कभी अपने पैतृृक प्रदेश में आकर लोगों की मदद करना चाहते हैं, पर अवहेलना के चलते प्रदेश में आकर कुछ समय रहने के बाद वापस लौट जाने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में यदि हमें प्रदेश को आगे बढ़ाना है तो नए विजन के साथ सामने आ रहे लोगों को आगे बढ़ाना ही होगा।

प्रदेश के कई लोगों के अनुसार जब कभी पुराने नेताओं को समस्याओं से अवगत कराया जाता है, तो वे केवल आश्वासन तक सीमित रहते हैं, यहां तक की पूछ लिया जाए कि आप इसे लेकर क्या एक्शन लेंगे, तो वे टालमटोल करते दिखते हैं। और समस्या का निदान न होने पर इसका ठिकरा किसी दूसरे पर फोड़ते दिखते हैं। वहीं यदि कोई ऐसी समस्या का समाधान करता भी है तो कुछ ही हद तक वह भी कामचलाउ। ऐसे में प्रदेश के अनेक क्षेत्रों की जनता का मानना है कि अब जिस नेता के पास समस्याओं के निदान की क्षमता होगी या​नी जो जनता की परेशानियों को दूर करने के​ लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं होगा, उसे ही वोट देना सार्थक होगा

कुल मिलाकर जनता का मूड़ इस बार जो इशारा करता दिख रहा है, उसके अनुसार 2027 के चुनावों में देवभूमि उत्तराखंड में किसी भी पार्टी को पुराने नेताओं को उतारने पर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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