March 8, 2026

कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz

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नई दिल्ली । कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की अंदरूनी खींचतान मंगलवार को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नुमाया हो गई। बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध रैली के दौरान मुख्यमंत्री उस वक्त बेहद असहज हो गए और अपना आपा खो बैठे जब उनके भाषण से ठीक पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने अपने चहेते नेता डीके शिवकुमार के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

रैली का मंजर: जब सिद्धारमैया पर भारी पड़े डीके के नारे

मंगलवार 27 जनवरी को बेंगलुरु में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ी रैली बुलाई थी। मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी थी लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पोडियम की ओर बढ़े: नारेबाजी की गूंज: जैसे ही सिद्धारमैया अपनी कुर्सी से उठे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “डीके डीके” के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते ये शोर इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री का भाषण शुरू होना मुश्किल हो गया।

आपा खो बैठे सीएम: नारेबाजी से चिढ़कर सिद्धारमैया ने पहले शांति की अपील की लेकिन जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने गुस्से में चिल्लाकर पूछा ये कौन है जो DK DK चिल्ला रहा है मंच से चेतावनी: स्थिति बिगड़ती देख मंच संचालक को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने यूथ कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा “हम जानते हैं आप कौन हैं शांति से मुख्यमंत्री की बात सुनिए।”

मुद्दा पीछे छूटा गुटबाजी आई सामने

यह रैली असल में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नया मिशन लाने के प्रस्ताव के विरोध में थी। रैली में डीके शिवकुमार रणदीप सुरजेवाला और कई मंत्री भी मौजूद थे लेकिन नेतृत्व संघर्ष की छाया ने असल मुद्दे को गौण कर दिया। राजनीतिक गलियारों की चर्चा: विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल नारेबाजी नहीं थी बल्कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रहे शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है। कई विधायक और एमएलसी खुले तौर पर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की लॉबिंग कर रहे हैं।

नेतृत्व परिवर्तन पर क्या है स्थिति

यद्यपि सिद्धारमैया बार-बार दावा कर रहे हैं कि वे अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और उन्हें आलाकमान का पूरा समर्थन प्राप्त है लेकिन मंगलवार की घटना ने साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा डीके शिवकुमार के लिए बेताब है। हालांकि डीके शिवकुमार ने आधिकारिक तौर पर यही कहा है कि वे हाईकमान के हर फैसले को स्वीकार करेंगे पर उनके समर्थकों का उत्साह सिद्धारमैया की राह में रोड़े अटका रहा है।

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