March 8, 2026

धमतरी में ऑटोमेटिक ई-चालान का आतंक: 'उटपटांग' कट रहे चालानों से जनता त्रस्त, अब कलेक्टर करेंगे राहत की पहल

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धमतरी । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए लागू की गई हाईटेक ई-चालान प्रणाली अब आम जनता के लिए गले की फांस बन गई है। आरटीओ और यातायात विभाग द्वारा शुरू किए गए ऑटोमेटिक ऑनलाइन ई-चालान सिस्टम से वाहन चालक इस कदर परेशान हैं कि शिकायतों का अंबार लग गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के संकेत दिए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों से खुद जिला कलेक्टर भी असहज महसूस कर रहे हैं और उन्होंने आम जनता को इस ‘तकनीकी प्रताड़ना’ से राहत दिलाने के लिए पहल शुरू कर दी है।

तकनीक का अजीब व्यवहार और चालान की मार शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए हाईटेक कैमरे वाहन चालकों के लिए खौफ का कारण बन गए हैं। यह सिस्टम चलते वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर स्वतः ही चालान जनरेट कर देता है। वाहन चालकों का आरोप है कि यह प्रणाली कई बार बिना किसी ठोस यातायात उल्लंघन के ही भारी-भरकम चालान काट रही है। सोमवार को अपनी व्यथा सुनाते हुए कई चालकों ने बताया कि उन्हें ऐसे अपराधों के लिए उटपटांग चालान भेजे जा रहे हैं, जो उन्होंने किए ही नहीं। जब अचानक मोबाइल पर चालान का मैसेज पहुंचता है, तो वाहन चालक यह समझ ही नहीं पाते कि आखिर उनसे गलती कहाँ हुई।

बढ़ता जन आक्रोश और प्रशासनिक सक्रियता बिना मानवीय हस्तक्षेप के कट रहे इन ऑनलाइन चालानों ने लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। कई मामलों में तो कैमरे की तकनीकी खराबी के कारण भी गलत चालान जारी होने की बात सामने आई है। रोजमर्रा के काम से घर से निकलने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह सिस्टम एक बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी बन चुका है। कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुँच रही शिकायतों की बाढ़ ने प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

कलेक्टर की पहल से जगी उम्मीद मामले की गंभीरता और जनता की नाराजगी को देखते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे इस सिस्टम की समीक्षा करेंगे। शिकायतों के निवारण के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने और गलत तरीके से कटे चालानों को रद्द करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। कलेक्टर की इस सक्रियता से अब धमतरी की जनता को उम्मीद बंधी है कि उन्हें कैमरों की इस मनमानी से जल्द निजात मिलेगी और यातायात नियमों के नाम पर हो रही इस तकनीकी धांधली पर अंकुश लगेगा।

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