March 9, 2026

सत्यजीत रे की पहली फिल्म से शुरू हुआ सफर, साधारण जिंदगी से सुपरस्टार तक: Soumitra Chatterjee की कहानी

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नई दिल्ली। बंगाली सिनेमा जगत के जाने-माने दिवंगत अभिनेता सौमित्र चटर्जी का आज जन्म दिवस है। भले ही वो आज हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनके काम की खूबसूरत विरासत हमेशा हमारे साथ रहेगी। चटर्जी ने अपने करियर में एक से बढ़कर फिल्में की थी। उन्होंने अपने करियर में सबसे ज्यादा काम डायरेक्टर सत्यजीत रे के साथ किया था। तो चलिए दिवंगद सुपरस्टार सौमित्र चटर्जी के जन्मदिन के खास अवसर पर जानते हें उनके जीवन से जुड़े कुछ यादगार पलों के बारे में पढ़िए
अभिनेता सौमित्र चटर्जी का जन्म 1935 में कोलकाता के सियासदह रेलव स्टेशन के पास मिर्जापुर स्ट्रीट में हुआ था। उनके पिता पेशे से वकील थे और शौकिया तौर पर अभिनेता के रूप में काम किया करते थे। सौमित्र अपने बचपन के दिनों से ही स्कूल के नाटकों में हिस्सा लिया करते थे और जैसे- जैसे वह बड़े होते गए बाद में उनकी रुचि थिएटर में धीरे- धीरे बढ़ती गई। उन्होंने कोलकाता के सिटी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। वह पढ़ाई के साथ थिएटर के प्ले में अभिनय किया करते थे। सौमित्र ने ऑल इंडिया रेडियो में अनाउंसर के रूप में अपनी पहली नौकरी की थी।

सौमित्र फिल्मों के सेट पर शूटिंग देखने जाया करते थे। इसी क्रम में एक बार सौमित्र सत्यजीत रे की फिल्म की शूटिंग देखने के लिए उनकी फिल्म के सेट पर गए थे। और डायरेक्टर सत्यजीत की नजर पड़ी सौमित्र पर, उन्होंने देखते ही देखते अपने मन ही मन अपनी अगली फिल्म ‘अपूर संसार’ के लिए सौमित्र को साइन कर लिया था। लेकिन उन्हें ये बात नहीं बताई। सत्यजीत ने एक दिन सौमित्र का लोगों से परिचय सौमित्र चट्टोपाध्याय कहकर करवाया और बताया कि वो उनके अगले फिल्म के हीरो हैं। उनकी यह बात सुनकर खुद सौमित्र भी हैरान रह गए थे की आखिर सत्यजीत रे ने ऐसा क्यों कहा।

सत्यजीत रे फिल्मों के निर्देशन के अलावा उपन्यास भी लिखते थे। उन्होंने ‘फेलूदा’ नाम की मशहूर मिस्ट्री थ्रिलर पर उपन्यास लिखा था और इसी उपन्यास पर उन्होंने फिल्म ‘सोनार केला’ बनाई थी। जिसका निर्देशन भी सत्यजीत ने किया था। साल 1979 में उन्होंने ‘सोनार केला’ का सीक्वल फिल्म ‘जॉय बाबा फेलूनाथ’ का निर्देशन किया था। बता दें की सौमित्र ने सत्यजीत रे के अलावा मृणाल सेन, रितुपर्णो घोष और तपन सिन्हा के साथ भी शानदार काम किया है।

सौमित्र चटर्जी को अपने शानदार अभिनय के लिए पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साल 2018 में उन्हें फ्रांस सरकार ने ‘लीजन ऑफ ऑनर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था। बता दें कि यह अवॉर्ड फ्रांस का सबसे बड़ा नागरिकता सम्मान है। चटर्जी ने अपने करियर में करीब 100 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया है, जिनमें दो हिंदी फिल्में ‘निरुपमा’ और ‘हिंदुस्तानी सिपाही’ भी शामिल हैं। लेकिन साल 2019 में कोरोना संक्रमित होने के चलते उनका 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

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