March 8, 2026

भारतीय प्रकाशन उद्योग की बदली तस्वीर: 2026 में आएगी नई इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट

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नई दिल्ली। भारत के प्रकाशन उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों को समझने और उनका आकलन करने के लिए अब एक और अहम अध्ययन सामने आने वाला है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एफआईपी ने नील्सनआईक्यू बुकडेटा के सहयोग से इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट – एडिशन 3 के लॉन्च की घोषणा कर दी है। यह रिपोर्ट प्रिंट बुक्स के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग और ऑडियोबुक के बढ़ते प्रभाव को न सिर्फ दर्ज करेगी बल्कि पहली बार उनके आर्थिक योगदान का भी विस्तृत विश्लेषण पेश करेगी।इस रिपोर्ट की घोषणा नई दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2026 के दौरान आयोजित एक मीडिया बातचीत में की गई। रिपोर्ट के अगस्त-सितंबर 2026 तक जारी होने की संभावना जताई गई है। प्रकाशन जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में पढ़ने की आदतें प्लेटफॉर्म और कंटेंट की खपत तेजी से बदल रही है।

एफआईपी के उपाध्यक्ष प्रणव गुप्ता ने बताया कि इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट का तीसरा संस्करण पहले के दोनों अध्ययनों से काफी अलग होगा। उन्होंने कहा कि अब तक की रिपोर्ट्स में मुख्य रूप से प्रिंट पब्लिशिंग पर फोकस किया गया था लेकिन नया संस्करण भारतीय बुक इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर सामने लाएगा। इसमें प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग के सभी स्वरूपों-ई-बुक्स और ऑडियोबुक-का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही यह भी आकलन किया जाएगा कि ये सभी प्रारूप भारतीय अर्थव्यवस्था में कितना योगदान दे रहे हैं।प्रणव गुप्ता ने इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2022 का हवाला देते हुए बताया कि उस अध्ययन के अनुसार भारत में 24000 से अधिक प्रकाशक सक्रिय हैं और हर साल 2.5 लाख से ज्यादा आईएसबीएन प्रकाशित होते हैं। उस रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि प्रिंट बुक मार्केट में स्कूल शिक्षा की हिस्सेदारी सबसे अधिक यानी 71 प्रतिशत थी जबकि उच्च शिक्षा का हिस्सा 25 प्रतिशत और ट्रेड पब्लिशिंग का योगदान करीब 4 प्रतिशत रहा।

उन्होंने कहा कि नया संस्करण प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों को एक साथ देखकर यह समझने की कोशिश करेगा कि प्रकाशन उद्योग किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। खास बात यह है कि पहली बार डिजिटल पब्लिशिंग के आर्थिक प्रभाव को आंकड़ों के साथ सामने रखा जाएगा जो उद्योग के लिए एक अहम संदर्भ साबित हो सकता है।नील्सनआईक्यू बुकडेटा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विक्रांत माथुर ने बताया कि रिपोर्ट के पहले संस्करणों में कोविड-19 का प्रकाशन उद्योग पर प्रभाव शिक्षा अवसंरचना का विस्तार स्कूल बोर्डों में नामांकन के रुझान आयात-निर्यात कॉपीराइट नीतियां और पाइरेसी जैसी चुनौतियों का अध्ययन किया गया था।

उन्होंने कहा कि अब पांच साल के अंतराल के बाद बाजार को दोबारा देखना जरूरी है ताकि यह समझा जा सके कि डिजिटल पब्लिशिंग किस तरह बढ़ी है उसका आकार क्या है और स्कूल उच्च शिक्षा तथा जनरल ट्रेड जैसे अलग-अलग सेगमेंट में उसका असर कैसा रहा है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में पब्लिशिंग इंडस्ट्री की तुलना संगीत और फिल्म जैसे अन्य एंटरटेनमेंट सेक्टर से भी की जाएगी।उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष न सिर्फ प्रकाशकों लेखकों और वितरकों के लिए उपयोगी होंगे बल्कि नीति-निर्माण और भविष्य की रणनीतियों को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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