March 8, 2026

महाकुंभ से सुर्खियों में आईं हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म का रास्ता, बोलीं– मैं सीता नहीं हूं जो अग्नि परीक्षा दूं

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नई दिल्ली।
प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान अचानक सुर्खियों में आईं सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने अब धर्म की राह छोड़ने का ऐलान कर दिया है। हर्षा ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि पिछले एक साल में उन्हें लगातार विरोध, मानसिक दबाव और चरित्र हनन का सामना करना पड़ा, जिसने उनके मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया।

महाकुंभ के दौरान हर्षा ने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया था और धर्म के रास्ते पर चलने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों को हर कदम पर रोका गया। हर्षा ने कहा,
“मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी, न चोरी, न अपराध। मैं सिर्फ धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती थी, लेकिन हर बार मुझे रोका गया।”

हर्षा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन पर लगे कुछ आरोप पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने यह धारणा बना दी कि उन्होंने महाकुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये कमाए, जबकि असलियत इसके विपरीत है। हर्षा ने कहा,
“आज मैं उधारी में हूं। धर्म की राह अपनाने से पहले मैं एक एंकर थी, अच्छा कमा रही थी और खुश थी।”

उन्होंने यह भी बताया कि जब कोई उनके मनोबल को नहीं तोड़ सका, तो उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए। हर्षा ने कहा,
“एक लड़की को तोड़ने का सबसे आसान तरीका उसका चरित्र हनन करना होता है।”

अपने बयान में हर्षा ने धर्म और धार्मिक प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा,
“आप अपना धर्म अपने पास रखिए। मैं मां सीता नहीं हूं जो बार-बार अग्नि परीक्षा दूं। जो परीक्षा मुझे देनी थी, वो मैं दे चुकी हूं।”

हर्षा ने घोषणा की कि माघ मेले की मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद वे अपने आध्यात्मिक संकल्प को विराम देंगी और अपने पुराने पेशे में लौटेंगी।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद हर्षा के फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे उनके आत्मसम्मान और व्यक्तिगत निर्णय के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे धर्म से पीछे हटना मान रहा है।

महाकुंभ से शुरू हुई हर्षा की यह कहानी अब आस्था, समाज और महिला सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर नए सवाल खड़े कर रही है।

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