March 8, 2026

तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव सुनील आंबेकर

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नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने रविवार को ‘दिल्ली महोत्सव 2026’ में हिस्सा लिया और संघ के 100 साल की यात्रा पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यदि समाज के महज तीन फीसदी लोग भी स्वयंसेवक बनेंतो इससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन और कार्य राष्ट्रीयता से प्रेरित था। उनका मानना था कि स्वतंत्रता के बाद भी देश की स्वाधीनता कायम रहनी चाहिए और राष्ट्र को समृद्धि की दिशा में ले जाना चाहिए। हेडगेवार ने इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थीताकि हिंदू समाज को एकजुट किया जा सके और देश में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

संघ की शाखाओं का महत्व

आंबेकर ने संघ की शाखाओं के बारे में विस्तार से बतायाजो जीवन के मूल्यों को सिखाने का एक मंच प्रदान करती हैं। एक घंटे की शाखाओं में स्थानीय लोग इकट्ठा होते हैंव्यायाम करते हैंचर्चाएं होती हैं और महापुरुषों के जीवन को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि शाखाओं में अनुशासन का अभ्यास कराया जाता हैऔर भगवा ध्वज के सामने रोज संकल्प लिया जाता है कि मैं ऐसा व्यक्ति बनूं जैसा देश और समाज के लिए आवश्यक है। आंबेकर ने बताया कि देशभर में रोजाना 87,000 से अधिक शाखाएं लगती हैंजबकि 32,000 शाखाएं सप्ताह में एक बार होती हैं। इसके अलावासुबह और शाम के समय भी विभिन्न शाखाएं आयोजित होती हैं।

संघ की विचारधारा और समाज में बदलाव

सुनील आंबेकर ने संघ की विचारधारा और उसके कार्यों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ के विचारों को कई लोग मानते हैंजबकि अन्य लोग उसके कार्यों में सहयोग करते हैं। डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि यदि शहरों और गांवों में एक से तीन फीसदी लोग भी स्वयंसेवक बनते हैंतो समाज में वह सकारात्मक वातावरण उत्पन्न किया जा सकता हैजिसे संघ बनाना चाहता है।

आंबेकर ने यह भी जोड़ा कि संघ का संगठन और शाखाएं देश के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यों को लेकर सक्रिय हैं और आने वाले समय में जब तक देश को इसकी आवश्यकता होगीसंघ का यह प्रयास जारी रहेगा।सुनील आंबेकर का यह बयान संघ के कार्यों और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के महत्व को उजागर करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों की भूमिका पर जोर देते हुए यह संदेश दिया कि समाज को बेहतर बनाने के लिए हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने की आवश्यकता है।

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