Small Saving Schemes Q4FY26: PPF और सुकन्या योजना पर ब्याज दरें स्थिर, निवेशकों को राहत
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरें तय करते समय महंगाई दर, सरकारी उधारी और बाजार में नकदी की स्थिति जैसे कई पहलुओं का ध्यान रखा जाता है। हर तिमाही इन दरों की समीक्षा होती है। श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के अनुसार, इन योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न समान अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड से थोड़ी अधिक होना चाहिए, ताकि निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक विकल्प मिल सके।छोटी बचत योजनाएं भारतीय घरेलू बचत का अहम हिस्सा हैं। इन 12 वित्तीय साधनों के माध्यम से लोग जोखिम से दूर रहकर निवेश कर सकते हैं। इन योजनाओं में जुटाई गई राशि नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड NSSF में जमा होती है, जिसका उपयोग सरकार वित्तीय प्रबंधन और घाटे की भरपाई के लिए करती है।
स्मॉल सेविंग स्कीम्स को संरचना के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में पोस्टल डिपॉजिट आते हैं, जिनमें सेविंग अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट, टाइम डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में सेविंग सर्टिफिकेट जैसे नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं हैं, जिनमें PPF सुकन्या समृद्धि योजना और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना प्रमुख हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार स्थिर ब्याज दर निवेशकों में विश्वास बनाए रखती है। यह खासकर उन लोगों के लिए अहम है जो लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं। 2026 की शुरुआत में ब्याज दरों में स्थिरता ने निवेशकों को यह संकेत दिया है कि सरकारी छोटी बचत योजनाएं जोखिम-मुक्त और लाभदायक विकल्प बनी हुई हैं।
