महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान
सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि इस योजना के तहत पात्र किसानों को ऋण माफी देने के लिए 5,975.51 करोड़ रुपये की आवश्यकता हैलेकिन सरकार ने केवल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है और क्या न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है?
किसान नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना की है। शिवसेना ठाकरे गुट के नेता भास्कर जाधव ने विधानसभा में इस मामले को उठाया और बताया कि उच्च न्यायालय ने भी सरकार को इस योजना को लागू करने का आदेश दिया थाफिर भी सरकार ने इसकी पूरी आवश्यकता का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा आवंटित किया है।
इतना ही नहींमुख्यमंत्री सहायता निधि में अक्टूबर महीने में 1 अरब रुपये जमा हुएलेकिन अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को सिर्फ 75 हजार रुपये की सहायता दी गई। इस मामले को लेकर भी RTI कार्यकर्ता वैभव कोकाट ने जांच की और पाया कि सरकार की मदद किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावाई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होनेबैंक और आधार जानकारी में अंतरऔर पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियों के कारण5 लाख 42 हजार 141 किसानों को घोषित मदद नहीं मिल पाई है।
राज्य सरकार द्वारा घोषित 31,628 करोड़ रुपये की सहायता पैकेज भी केवल दिखावे का हिस्सा बनकर रह गया हैक्योंकि योजना की क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं आई हैं। इस सब के बीचकिसानों को प्राकृतिक आपदाओंफसल नुकसान और कर्ज जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैऔर वे उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस मामले में ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।
किसानों के हित में यदि सरकार जल्द से जल्द ऋण माफी योजना को लागू नहीं करती और उनकी परेशानियों को ध्यान में नहीं रखतीतो यह राज्य में किसानों के बीच और अधिक असंतोष पैदा कर सकता है। इस बीचयह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिरकार किसानों को अपनी मेहनत का क्या फल मिलेगाजब सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल रहा है।
