March 8, 2026

रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़ी 1,120 करोड़ की संपत्तियां अटैच

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Rel-Anil Ambani

– यस बैंक ‘धोखाधड़ी मामले’ में ईडी ने की रिलायंस समूह की 18 संपत्तियां जब्त
– इनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सात, रिलायंस पावर की दो, रिलायंस वैल्यू की नौ

नई दिल्ली। ईडी ने कहा कि उसने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और यस बैंक से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में रिलायंस अनिल अंबानी समूह की 1,120 करोड़ रुपये की नई संपत्तियों को अटैच किया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ चल रही मनी लांड्रिंग की जांच के तहत कुल अठारह सम्पत्तियां जिनमें मुंबई के बैलार्ड एस्टेट में स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स्ड डिपाजिट, बैंक बैलेंस और रिलायंस अनिल अंबानी समूह में अनकोटेड निवेशों में शेयरहोल्डिंग को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है। जब्त की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की सात संपत्तियां, रिलायंस पावर लिमिटेड की दो संपत्तियां और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की नौ संपत्तियां शामिल हैं। रिलायंस वैल्यू सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, फाई मैनेजमेंट साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, आधार प्रापर्टी कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और गेमेसा इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े फिक्स्ड डिपाजिट और निवेश भी अटैच किए गए हैं। ईडी ने कहा कि इस कार्रवाई के साथ समूह से जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य अब 10,117 करोड़ रुपये हो गया है। इससे पहले, जांच एजेंसी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकाम), आरएचएफएल और आरसीएफएल से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में 8,997 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया था। ईडी ने कहा कि वह अपराध की आय की वसूली और उन्हें सही दावेदारों को लौटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा
ईडी की जांच में समूह की कंपनियों द्वारा सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर डायवर्जन उजागर हुआ है, जिसमें आरकाम, आरएचएफएल, आरसीएफएल, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर शामिल हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने आरएचएफएल में 2,965 करोड़ रुपये और आरसीएफएल के उपकरणों में 2,045 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो बाद में नान-परफार्मिंग एसेट बन गए। 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक धन म्यूचुअल फंड निवेश और यस बैंक के लेंडिंग के जरिये डायवर्ट किया गया, जो सेबी के नियमों का उल्लंघन करता है। ये फंड कंपनियों तक “परिपत्र मार्ग” के माध्यम से पहुंचे, जिसमें रिलायंस निप्पान म्यूचुअल फंड और यस बैंक शामिल हैं। अलग से ईडी आरकाम, अनिल अंबानी और सहयोगियों के खिलाफ 2010 से 2012 के बीच लिए गए 40,185 करोड़ रुपये के ऋण के संबंध में सीबीआइ द्वारा दर्ज एफआइआर की जांच कर रहा है। नौ बैंकों ने इन खातों को धोखाधड़ी घोषित किया है। 13,600 करोड़ रुपये से अधिक का धन ऋण एवरग्रीनिंग के लिए डायवर्ट किया गया, 12,600 करोड़ रुपये संबंधित संस्थाओं को भेजे गए और 1,800 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश में पार्क किया गया था, जिसे फिर डायवर्ट किया गया।

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