– धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन की आड़ में कर रहा था खेल
– 11 करोड़ की फंडिंग से अमरोहा व पंजाब में खरीदी जमीने भी
– मस्जिद व मदरसे बनवाने की थी योजना, अन्य की तलाश
राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जुडा एक और गंभीर मामला सामने आया है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने अलकायदा के इशारे पर हिंसा फैलाने का षड़यंत्र रच रहे सहारनपुर के बिलाल खान की गिरफ्तारी के बाद धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेश से 11 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने व बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह दिलाने के गंभीर मामले में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। गौतमबुद्धनगर से शुक्रवार को पकड़ा गया नबी भड़काऊ पुस्तकों का प्रकाशन भी करता था और उनके मध्याम से विदेशी फंडिंग करा रहा था।
एटीएस अधिकारियों के अनुसार नबी इस्तानबुल इंटरनेशनल कंपनी का सह निदेशक है और इसी कंपनी के माध्यम से विदेश से फंड जुटाया गया था। फंडिंग की रकम से अमरोहा व पंजाब में मस्जिद और मदरसे बनाने के लिए जमीन भी खरीदी गई थी। वह अपने सहयोगी नासी तोर्बा के साथ मिलकर कई अन्य कंपनियों का संचालन भी करता है। वह ग्रेटर नोएडा में भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन कर उन्हें वितरित भी करा रहा था। उसके नेटवर्क से जुड़े कई लोग तुर्की व जर्मनी से यहां आते थे, जिसकी सूचना पुलिस को नहीं दी जाती थी। विदेश से हवाला एवं अन्य माध्यम से पैसा मंगाया जा रहा था। नबी अपने अन्य सहयोगियों के साथ इस्तानबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, हकीकत वाकफी फाउंडेशन, रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लाजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड व अन्य कंपनियों का संचालन कर रहा था। ग्रेटर नोएडा के कासना में हकीकत प्रिंटिंग पब्लिकेशन का इस्तेमाल धार्मिक एवं विभिन्न समूह के बीच शत्रुता व वैमनस्यता फैलाने वाली किताबों का प्रकाशन करने में हो रहा था। गिरोह बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी शरण दिलाता था, जिसमें फरहान नबी की सबसे अहम भूमिका होती थी। नबी के कब्जे से दो मोबाइल, तीन लैपटाप, हिंदी, उर्दू, अरबी, बांग्ला भाषा में प्रकाशित 12 किताबें बरामद की गई हैं। एटीएस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की छानबीन कर रहा है।
एटीएस ने फरहान नबी व नासी तोर्बा के विरुद्ध गोपनीय सूचना पर छानबीन शुरू की थी। मामले नासी समेत अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।