March 8, 2026

कॉप-30: जलवायु परिवर्तन पर ‘अगला दशक तय लक्ष्यों को साधने का’

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India

कॉप30 नेताओं के शिखर सम्मेलन में भारत ने एक बार फिर वैश्विक जलवायु असमानता पर स्पष्ट संदेश दिया—‘अब वक्त लक्ष्य तय करने का नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने का है।’ पेरिस समझौते के दस वर्ष पूरे होने पर भारत ने कहा कि वैश्विक जलवायु महत्वाकांक्षा अभी भी ‘अपर्याप्त’ है और कई देशों की ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान योजनाएं’ (एनडीसी) तय लक्ष्यों से पीछे हैं। भारतीय राजदूत दिनेश भाटिया ने विकसित देशों से अपील की कि वे उत्सर्जन में कटौती की रफ्तार तेज करें, ‘नेट जीरो’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करें व विकासशील देशों के लिए भरोसेमंद, सस्ती और पर्याप्त जलवायु वित्त उपलब्ध कराएं। भारत ने ब्राजील की पहल ‘ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी’ में बतौर पर्यवेक्षक शामिल होकर वर्षावनों की सुरक्षा के लिए वैश्विक सहयोग का समर्थन किया। इस फंड से 125 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य है।

एनडीसी 3.0 पर भारत की तैयारी व अपेक्षा
पेरिस समझौते के तहत सभी देशों को 2031-2035 अवधि के लिए तीसरे चरण के दस्तावेज ’एनडीसी 3.0’ इस वर्ष प्रस्तुत करने हैं। भारत इस अपडेट की हुई योजना को कॉप30 से पहले या सम्मेलन के दौरान जमा कर सकता है। एनडीसी समग्र रूप में वे राष्ट्रीय जलवायु योजनाएं हैं जो उत्सर्जन में कटौती और जलवायु परिवर्तन से अनुकूलन के लक्ष्य तय करती हैं, जिससे वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का प्रयास होता है।

घरेलू उपलब्धियों से दिखाई राह… भाटिया ने बताया कि भारत ने 2005 से 2020 के बीच अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी की और कई लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त किया। गैर-जीवाश्म ऊर्जा अब भारत की कुल बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा है।

कॉप30 मुख्य बिंदु

भागीदारी: यह संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के 198 हस्ताक्षरकर्ता देशों (पार्टियों) की अगली बैठक होगी।

स्थान और तिथि: कॉप30 सम्मेलन ब्राजील के अमेजन द्वार कहे जाने वाले बेलम शहर में 10 से 21 नवंबर तक आयोजित होगा।

मुख्य एजेंडा
नई और संशोधित एनडीसी 3.0 प्रस्तुत करना।
जलवायु लचीलापन और प्रकृति संरक्षण के लिए वित्तपोषण पर चर्चा।
खाद्य प्रणाली में रुपांतरण के उपाय।
न्यायसंगत संक्रमण सुनिश्चित करने की दिशा में नीति निर्माण।

महत्व
यह बैठक बहुपक्षीयता के लिए निर्णायक मोड़ पर हो रही है।
इसका उद्देश्य वैस्त्रिक जलवायु सहयोग को पुनर्जीवित करना है।
सम्मेलन में बहु—हितधारक कार्रवाई को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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