March 8, 2026

भारत-यूके ट्रेड डील से लक्जरी कार इंडस्ट्रीज संकट में, बुकिंग हुई सुस्त…

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नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन (India and Britain) के बीच होने वाले व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (Comprehensive Economic Trade Agreement- CETA) ने लक्जरी कार इंडस्ट्रीज (Luxury Car Industries) को झटका दिया है। कैबिनेट से सोमवार को मंजूरी मिली इस डील के चलते, भारत में महंगी कारों की बिक्री पर संकट के बादल छा गए हैं। यूके में बनी लैंड रोवर, जैगुआर (दोनों टाटा मोटर्स के स्वामित्व में), रोल्स रॉयस, बेंटले, एस्टन मार्टिन जैसी प्रीमियम कारों पर आयात शुल्क घटने की उम्मीद में अमीर ग्राहकों ने बुकिंग रोक दी है।

ड्यूटी घटने की अफवाह, बुकिंग पर ब्रेक
मई में भारत-यूके FTA की घोषणा हुई थी, जिसमें पूरी तरह बनी कारों (CBU) पर मौजूदा 75-125% आयात शुल्क घटाकर 10% करने का प्रस्ताव है। इस खबर ने लक्जरी कार खरीदारों को सतर्क कर दिया। कई अति-धनाढ्य ग्राहकों ने कम शुल्क का फायदा उठाने के लिए न केवल बुकिंग टाल दी, बल्कि कुछ ने ऑर्डर रद्द भी करवा लिए।

एक प्रमुख ब्रांड के डीलर ने बताया, “ग्राहक ब्रांड्स को ऑर्डर देने के बाद भी बुकिंग स्थगित कर रहे हैं। इससे भारतीय बाजार की छवि खराब हो रही है। कई लक्जरी ब्रांड्स सीमित संख्या में कारें बनाते हैं ताकि उनकी विशिष्टता बनी रहे। अब वे उत्पादन दूसरे बाजारों में मोड़ रहे हैं।”

डीलर्स की चिंता, ग्राहकों का लॉजिक
ग्राहकों का उत्साह समझना मुश्किल नहीं। कुछ कारों का भारत में अंतिम ऑन-रोड मूल्य, ब्रिटेन की तुलना में लगभग तीन गुना तक पहुंच जाता है। सिर्फ ऊंचा आयात शुल्क ही नहीं, स्थानीय टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज भी कीमत बढ़ाते हैं। हालांकि, मई में डील की घोषणा के बाद जो ग्राहकों का बहाव शुरू हुआ था, वह अब कम हो रहा है।

डीलर्स ग्राहकों को स्पष्टीकरण देकर स्थिति संभाल रहे हैं। एक अन्य डीलर ने बताया, “हम ग्राहकों को समझा रहे हैं कि अभी खरीदना भी नुकसानदायक नहीं होगा। पहली बात, डील लागू होने में अभी करीब एक साल लगेगा। दूसरा, शुल्क घटकर एकदम से 10% नहीं होगा। यह कई सालों में धीरे-धीरे घटेगा और सालाना कोटा भी लागू हो सकता है।”

इंतजार करने का खतरा?
डीलर्स ग्राहकों को यह भी समझा रहे हैं कि प्रतीक्षा करना महंगा पड़ सकता है। “लक्जरी कारों की कीमतें हर साल लगभग 5% बढ़ जाती हैं। पाउंड के मुकाबले रुपये की कमजोरी से भी कीमतें प्रभावित हुई हैं। सालों तक ड्यूटी कम होने का इंतजार करना, न सिर्फ कार मिलने में देरी करेगा, बल्कि बढ़ी हुई कीमत पर खरीदने का जोखिम भी बढ़ाएगा।” फिलहाल, डील पर हस्ताक्षर के बाद शुल्क में कमी का रोडमैप स्पष्ट होगा। तब तक डीलर और ग्राहक, दोनों ही अनिश्चितता के साये में हैं।

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