March 8, 2026

Myanmar: बौद्ध मठ पर सेना की एयरस्ट्राइक, चार मासूम बच्चों समेत 23 की मौत

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यांगून। केंद्रीय म्यांमार (Myanmar) के सागाइंग इलाके (Sagaing area) में गुरुवार तड़के एक बौद्ध मठ पर किए गए सैन्य हवाई हमले (Air Strike) में कम से कम 23 लोगों की जान चली गई. मृतकों में चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं. ये हमला लिं ता लू गांव में हुआ, जो मंडाले शहर (Mandalay City) से करीब 35 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है और सैन्यविरोधी गतिविधियों का गढ़ माना जाता है. घटना रात करीब 1 बजे की है जब गांव के बौद्ध मठ में 150 से ज्यादा लोग सैन्य अभियानों से बचने के लिए शरण लिए हुए थे. उसी वक्त वायुसेना ने हमला कर दिया, जिससे पूरा इलाका दहल उठा. यह खबर ऐसे समय में आई है जब म्यांमार बॉर्डर तक भारत ट्रेन चलाने का प्लान कर रहा है।

स्थानीय प्रतिरोध समूह के एक सदस्य ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, ’23 नागरिकों की मौत हो गई है, जिनमें चार बच्चे शामिल हैं. करीब 30 लोग घायल हैं, जिनमें 10 की हालत नाजुक बनी हुई है.’ घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है. घायल लोगों को स्थानीय क्लिनिकों में ले जाया गया जहां संसाधनों की भारी कमी के कारण उन्हें इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. म्यांमार की सेना ने अब तक हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. स्वतंत्र न्यूज संस्था डेमोक्रेटिक वायस ऑफ बर्मा ने मृतकों की संख्या 30 तक बताई है, लेकिन इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

चुनाव से पहले ‘शक्ति प्रदर्शन’?
यह हमला उस वक्त हुआ है जब म्यांमार की सेना ने हाल ही में सागाइंग में बड़े स्तर पर सैन्य अभियान शुरू किया है. टैंक और लड़ाकू विमान मैदान में उतारे जा चुके हैं ताकि स्थानीय विद्रोही समूहों से क्षेत्र को दोबारा कब्जे में लिया जा सके. विपक्षी नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट के प्रवक्ता ने कहा, ‘जुंटा यह सब इसलिए कर रही है ताकि आने वाले चुनावों से पहले अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सके. उन्हें उम्मीद है कि ऐसा करके वे सत्ता में बने रहेंगे।

म्यांमार में सेना का शासन
फरवरी 2021 में आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर म्यांमार की सेना ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. तभी से पूरे देश में लोकतंत्र समर्थकों और सेना के बीच संघर्ष तेज हो गया. खासकर सागाइंग में, जहां आम नागरिकों और स्थानीय मिलिशिया समूहों ने सैन्य नियंत्रण के खिलाफ जंग छेड़ रखी है. अब आम नागरिकों की जान मठों में भी सुरक्षित नहीं है।

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