इस गुरु पूर्णिमा पर बन रहा अत्यंत ही शुभ योग #Guru Purnima 2025

10 जुलाई 2025 को गुरु पूर्णिमा उपवास और स्नान-दान पर्व मनाया जाएगा, इसे आषाढ पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पर्व महर्षि वेद व्यास के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास को तीनों कालों का ज्ञाता माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि व्यास ने ही वेदों को अलग-अलग खंडों में विभाजित कर उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद रखा। जिस कारण उन्हें वेद व्यास कहा जाने लगा।
ज्योतिष के जानकार पंडित सुनील शर्मा के अनुसार हिंदू धर्म में गुरु को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है। गुरु ही हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित करता है। गुरू ही हमें जीवन के मूलभूत सिद्धातों से परिचित कराता है। गुरु की महत्ता समझते हुए उनके सम्मान में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा पर इंद्र योग, वैधृति योग, मिथुन राशि में सूर्य और गुरु की युति से गुरु आदित्य योग का निर्माण हो रहा है, जो अत्यंत ही शुभ योग है।
गुरु पूर्णिमा 9/10 जुलाई की रात्रि 01.39 से 10/11 जुलाई की रात्रि 02.08 बजे तक रहेगा।
जानें क्या करें इस दिन
पूर्णिमा पर्व पर ब्रह्म मुहूर्त में जागकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर घर में मंदिर को गंगाजल से पवित्र करें। व्रत का संकल्प लें और मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु और भोलेनाथ को स्नानादि कराकर आसन प्रदान करें। रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप नैवेद्य अर्पित करें। अपने गुरु का ध्यान करें, यदि संभव हो तो गुरु के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें। गुरु को श्रद्धापूर्वक अन्न, वस्त्र, मिष्ठान, फूल माला, दक्षिणा आदि भेंट करे। सर्वप्रथम गुरु हमारी मां होती है, उसका सम्मान करें और उन्हें भेंट आदि देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। गुरु पूर्णिमा पर सफेद वस्तुओं का दान अवश्य करें। खीर को प्रसाद रूप में वितरित करने से विशेष लाभ प्राप्त होंगे। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो और पूर्णिमा का उपवास प्रारंभ करना चाहते हों, वह अब से उपवास प्रारंभ कर सकते हैं।
