उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पर रोक के बीच आई राहत की खबर

हाईकोर्ट के पंचायत चुनाव पर रोक संबंधी आदेश के बाद उत्तराखंड में विभिन्न पदों पर तैयारी कर रहे नेताओं को झटका लगा है। इस बीच अब सचिव पंचायतीराज चंद्रेश कुमार ने बताया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था से संबंधित नियमावली की अधिसूचना यानी गजट नोटिफिकेशन की प्रक्रिया गतिमान है।
उनके अनुसार माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा वर्तमान में पंचायतों में आरक्षण प्रक्रिया पर अंतरिम आदेश पारित किया गया है, जिसकी समुचित रूप से अनुपालना की जा रही है।
सचिव पंचायतीराज का कहना है कि आरक्षण नियमावली 2025 की गजट नोटिफिकेशन की प्रति प्रिंटिंग के लिए राजकीय प्रेस रुड़की में गतिमान है, जिसे शीघ्र जारी कर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि स्थिति से अवगत कराते हुए उचित न्यायिक मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सके।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार न्यायालय की पूर्ण गरिमा एवं निर्देशों का सम्मान करते हुए पंचायतीराज व्यवस्था को संविधान व विधि सम्मत रूप से संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ज्ञात हो कि हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर अगली सुनवाई 27 जून शुक्रवार को होनी है। इस दिन सरकार फिर से अपना पक्ष रखेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि 27 जून के बाद पंचायत चुनाव की राह आसान होगी।
ऐसे में सचिव पंचायतीराज चंद्रेश कुमार की त्वरित प्रक्रिया इस ओर इशारा करती दिख रही है कि पंचायत चुनाव देर से सही लेकिन होंगे जरूर….
ये है मामला…
दरअसल त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट में बागेश्वर निवासी गणेश दत्त कांडपाल एवं अन्य की ओर से याचिकाएं दायर की गई थीं। जिसमें याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने 9 जून 2025 को पंचायत चुनावों के लिए नई नियमावली जारी की और 11 जून को एक आदेश के जरिए पहले लागू आरक्षण रोटेशन को शून्य घोषित करते हुए नई रोटेशन प्रक्रिया लागू कर दी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस नए आरक्षण रोटेशन के चलते कुछ सीटें जो पहले ही तीन बार आरक्षित रह चुकी थीं, उन्हें इस बार भी आरक्षित कर दिया गया है, जिससे वे पंचायत चुनावों में भाग लेने से वंचित हो गए हैं।
वहीं राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि इसी तरह के कुछ मामले हाईकोर्ट की एकलपीठ में भी विचाराधीन हैं। जबकि याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि खंडपीठ के समक्ष 9 जून को जारी नियमावली को चुनौती दी गई है, जबकि एकलपीठ में केवल 11 जून के आदेश को चुनौती दी गई है।
ज्ञात हो कि बीते शुक्रवार को अदालत ने राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार इस पर संतोषजनक जवाब देने में विफल रही। इसके विपरीत, राज्य सरकार ने मामले के न्यायालय में लंबित रहने के बावजूद चुनाव की तिथियां घोषित कर दीं। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
