March 8, 2026

महंगाई से फिलहाल राहत, लेकिन आम आदमी पर लगातार बढ़ रहा टैक्स का बोझ

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नई दिल्ली। बीते कुछ महीनों से महंगाई दर में गिरावट (Inflation rate decline) देखने को मिल रही है। जाहिर है कि इससे आम आदमी (Common man) का जेब खर्च कम हुआ। खासकर खाद्य वस्तुओं (Food items) पर होने वाले खर्च में कमी आई होगी, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं निकाला जा सकता है कि लोगों की जेब पर औसत खर्च का बोझ कम हुआ होगा। आंकड़े बताते हैं कि देश में हर व्यक्ति पर टैक्स का बोझ है, जो साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। स्कूलों की फीस 10-20 फीसदी तक बढ़ रही है।

सड़क पर गाड़ी चलाना भी पांच से 10 फीसदी तक महंगा हो रहा है। आलम यह है कि बीते 10-15 वर्षों के दौरान आम आदमी पर टैक्सेज का बोझ बढ़ा है ,क्योंकि हर तरह की सेवा पर शुल्क एवं कर वसूला जा रहा है। कुछ नए कर जीवन में जुड़े हैं तो वहीं पूर्व से निर्धारित करों को भी लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिसे कुछ तरह से समझा जा सकता है…

बैंक की हर सेवा पर शुल्क
बीते एक से डेढ़ दशक में बैंकिंग सेवा में सुधार हुआ है लेकिन बैंकों ने हर सेवा पर शुल्क लगाया दिया है, जिस पर जीएसटी अलग से लिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर एक मई से बैंकों ने एटीएम से अपने निर्धारित बैंक से पांच लेन-देन की मासिक सीमा के बाद प्रत्येक लेन-देन पर 23 रुपये शुल्क के साथ जीएसटी भी लगा दिया है। यह सिर्फ एक सेवा की बात है, बाकी सूची लंबी है। आलम यह है कि बैंक न्यूनतम बैंलेस न होने पर भी ग्राहकों पर भारी जुर्माना लगा रहे हैं, जिससे एक वर्ष में 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हो रही है।

बैंक की प्रमुख सेवाएं- शुल्क
डुप्लीकेट पासबुक – 100 रुपये
डुप्लीकेट पासबुक एंट्री के साथ – 50 रुपये प्रति पेज अतिरिक्त
चेक भुगतान को रोकना – 200 रुपये प्रति चेक से अधिकतम 500 रुपये।
ग्राहक की कमी से चेक वापस होना – 150 रुपये
हस्ताक्षर सत्यापन – 100 रुपये
संयुक्त बैंक खाते में हस्ताक्षर सत्यापन – 150 रुपये
डिमांड ड्राफ्ट – पांच से 10 हजार तक 75 रुपये
पोस्टल चार्ज – 50 से 100 रुपये
ब्रांच से कैश निकासी – पांच बार के बाद 75 रुपये प्रति निकासी
खाता रखरखाव चार्ज – 500 रुपये
एसएमएस अलर्ट – 10 से 35 रुपये प्रति तिमाही
बैंक खाते में मोबाइल नंबर व ई-मेल आईडी बदलना – 50 रुपये व जीएसटी अतिरिक्त
डेबिट कार्ड रखरखाव चार्ज – 250 से 800 रुपये।
डेबिट कार्ड री-पिन बदलना – 50 रुपये

शिक्षा खर्च में प्रतिवर्ष 20 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी
हर परिवार की जेब पर शिक्षा खर्च का बोझ तेजी से बढ़ा है। स्कूल अपनी फीस में भले ही सरकारी नियमों के हिसाब से बढ़ोत्तरी कर रहे हों, लेकिन उसके अतिरिक्त तमाम मदों में बढ़ोत्तरी की जा रही है। स्थिति यह है कि अगर किसी स्कूल की फीस वर्ष 2014-15 में तीन से चार हजार रुपये मासिक थी तो वह अब 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। बीते तीन वर्षों के दौरान ही स्कूली शिक्षा खर्च 50 से 60 फीसदी तक बढ़ गया है। डोनेशन, एडमिशन, वार्षिक फीस, ड्रेस, किताब, जूते, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च हर साल 10-20 फीसदी के बीच बढ़ रहा है।

दूध, दही और आटा भी आया कर के दायरे में
जुलाई 2022 से पैकेट बंद दूध, दही, पनीर और आटे पर जीएसटी लगाया जा रहा है। इन सभी पर पांच फीसदी जीएसटी है। जुलाई 2017 में जीएसटी के आने के बाद सामान्य जीवन से जुड़ी काफी चीजें कर के दायरे में आ गई हैं, जिससे आम आदमी के जेब पर करों का बोझ बढ़ा है।

गाड़ी चलाना प्रतिवर्ष 15 फीसदी तक महंगा हुआ
बीते एक दशक से गाड़ी खरीदना और चलाना महंगा हो रहा है। देश में टोल प्लाजा की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनकी हर वर्ष टोल दर पांच से 10 फीसदी तक बढ़ रही है। इतना ही नहीं, गाड़ी पर लगे फास्टैग पर भी चार्ज लगा दिए हैं। उधर, गाड़ियों की कीमतें भी हर वर्ष 10 से 15 फीसदी के औसत से बढ़ रही हैं। गाड़ियों का प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाना और बीमा कराना भी महंगा हो गया है, जिस पर 18 फीसदी जीएसटी अलग से लग रहा है।

फास्टैग का सर्विस चार्ज
टैग फीस 100 रुपये
न्यूनतम बैलेंस (कार) 200 रुपये
नेट बैंकिंग से रिचार्ज 8 रुपये व जीएसटी प्रति रिचार्ज
क्रेडिट कार्ड से रिचार्ज 0.90 प्रतिशत व जीएसटी प्रति रिचार्ज
इंश्योरेंस फीस 100 रुपये
दोबारा से टैग जारी होना 100 रुपये
सिक्योरिटी जमा 100 रुपये
स्टेटमेंट 50 रुपये प्रति

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